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Saturday, February 14, 2026

बस्तर पर्यटन को नई रफ्तार: प्राकृतिक धरोहरों पर बढ़ीं सुविधाएँ, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला संबल…

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हाइलाइट्स:
• चित्रकोट, तीरथगढ़ सहित प्रमुख स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार
• जगदलपुर में टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर और डिजिटल सेवाएँ शुरू
• स्थानीय युवाओं को गाइड, होम-स्टे व हस्तशिल्प के जरिए रोजगार
• पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन को समान प्राथमिकता

आधारभूत ढांचे के विस्तार से बदला पर्यटन परिदृश्य

बस्तर अंचल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झरनों और जनजातीय संस्कृति के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रहा है, लेकिन अब यहां पर्यटन विकास को नई गति मिली है। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सहित दंतेवाड़ा, बारसूर, नारायणपुर और कोंडागांव के प्रमुख स्थलों पर सड़क संपर्क सुदृढ़ किया गया है। पर्यटकों के लिए पार्किंग, पेयजल, आधुनिक शौचालय, विश्राम शेड, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है। सूचना केंद्र, हेल्प डेस्क, व्यू-पॉइंट और सेल्फी जोन जैसे आकर्षण इन स्थलों की उपयोगिता और सौंदर्य दोनों बढ़ा रहे हैं।

डिजिटल पहल और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

जगदलपुर में स्थापित टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर के माध्यम से आवास, स्थानीय भ्रमण और गाइड सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था से पर्यटन सेवाएँ अधिक पारदर्शी और सुलभ हुई हैं। इस विकास का सीधा लाभ स्थानीय युवाओं को मिला है—गाइड प्रशिक्षण, आतिथ्य सेवाएँ, साहसिक पर्यटन गतिविधियाँ और होम-स्टे योजनाओं के जरिए स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं। बेलमेटल कला, टेराकोटा और जनजातीय हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान पर संतुलित फोकस

पर्यटन विस्तार के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र, हरित पट्टी विकास और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों से प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने की पहल की गई है। साथ ही बस्तर दशहरा और मड़ई महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। पर्यटन विभाग दीर्घकालीन मास्टर प्लान के तहत इको-टूरिज्म, वाइल्डलाइफ और साहसिक पर्यटन को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में बस्तर देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अपनी विशिष्ट पहचान और मजबूत करेगा।

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