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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से बगावती सुर: इस्लामिक उपदेशक बोले – “जंग हुई तो भारत का देंगे साथ”

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इस्लामाबाद/पेशावर: 06 मई 2025 (एजेंसी रिपोर्ट)

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के बीच पाकिस्तान के भीतर से ही असंतोष की आवाजें तेज़ होती जा रही हैं। खासकर पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में स्थित कुछ इस्लामिक उपदेशकों और आम नागरिकों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक स्थानीय इस्लामी उपदेशक ने पाकिस्तान की सेना के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए कहा है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग होती है तो पश्तून समुदाय भारतीय सेना का समर्थन करेगा।

एक वीडियो में उपदेशक एक खुले मंच से संबोधित करते हुए कहता है, “पाकिस्तानी सेना ने हमारे साथ वर्षों से अत्याचार किए हैं। हमारे घर उजाड़े, हमारे युवाओं को गायब किया, और हमारे इलाके बर्बाद कर दिए। आप सोचते हैं कि हम उनके लिए ‘जिंदाबाद’ कहेंगे? कभी नहीं। अगर अब युद्ध होता है तो हम भारत का समर्थन करेंगे।” इस बयान ने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि यह असंतोष अब किसी बंद कमरे की बातचीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुले मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ रहा है।

मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप:

इस उपदेशक ने अपने भाषण में पाकिस्तान की सेना पर पश्तून इलाकों में लगातार मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया। उसने कहा कि सेना ने स्थानीय आबादी के साथ अमानवीय व्यवहार किया है, जिससे लोगों का भरोसा पूरी तरह से सैन्य संस्थानों से उठ गया है। यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है। इसके जवाब में भारतीय सेना ने रणनीतिक मोर्चों पर अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है।

बढ़ती बगावत, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता:

खैबर पख्तूनख्वा में सेना के खिलाफ बगावत के सुर कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन इस बार की प्रतिक्रिया अधिक व्यापक और मुखर नजर आ रही है। पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) जैसे संगठन पहले से ही सेना के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, और अब धार्मिक मंचों से भी यह नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि अगर ऐसे विचार आम जनता में घर करने लगे, तो युद्ध की स्थिति में भीतरी समर्थन का संकट खड़ा हो सकता है।

पाक सरकार की चुप्पी:

अब तक पाकिस्तान सरकार या सेना की तरफ से इस वायरल वीडियो पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस तरह की प्रतिक्रियाएं बढ़ती हैं तो यह ना सिर्फ पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बनेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को भी नुकसान पहुंचाएगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के इस दौर में पाकिस्तान के अंदर से उठती असहमति की आवाजें इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि वहां का आंतरिक माहौल बेहद अस्थिर और विस्फोटक होता जा रहा है। खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना के खिलाफ बढ़ता जनरोष पाकिस्तान के लिए भविष्य में एक गंभीर संकट खड़ा कर सकता है — खासकर तब, जब युद्ध जैसे हालात बनते हैं।

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