स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स बॉक्स
- 19 से 21 अप्रैल तक भारत दौरे पर रहेंगे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति
- आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगा नया आयाम
- “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के दूसरे दशक में प्रवेश का अहम पड़ाव
- रक्षा और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं
द्विपक्षीय संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung का 19 से 21 अप्रैल तक प्रस्तावित भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह यात्रा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को भी नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका The Diplomat के अनुसार, वर्ष 2026 को भारत और दक्षिण कोरिया के “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के दूसरे दशक की नई शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।
लंबे अंतराल के बाद उच्चस्तरीय संपर्क
दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच यह दौरा लंबे अंतराल के बाद हो रहा है। इससे पहले दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा जुलाई 2018 में हुई थी, जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फरवरी 2019 में दक्षिण कोरिया का दौरा किया था। इसके बाद द्विपक्षीय संपर्क मुख्य रूप से बहुपक्षीय मंचों तक सीमित रहे। ऐसे में यह यात्रा ठहराव को तोड़कर नई ऊर्जा देने का अवसर मानी जा रही है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका
वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हुई है। भारत अब फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और इस दशक के अंत तक जापान व जर्मनी को पीछे छोड़ तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और एफडीआई नियमों में उदारीकरण ने भारत को वैश्विक निवेशकों और साझेदार देशों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।
“ग्लोबल साउथ” रणनीति में भारत की अहमियत
दक्षिण कोरिया की वर्तमान सरकार, जो 2025 में सत्ता में आई, पूर्व राष्ट्रपति Moon Jae-in की “न्यू सदर्न पॉलिसी” को आगे बढ़ा रही है। इसके तहत एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। “123 नेशनल पॉलिसी एजेंडा” में “ग्लोबल साउथ” पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें भारत एक प्रमुख भूमिका निभाता है। ऐसे में सियोल के लिए नई दिल्ली के साथ संबंध मजबूत करना रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है।
रक्षा और आर्थिक सहयोग में नए अवसर
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पूरक क्षमताएं मौजूद हैं, जिन्हें अभी पूरी तरह से उपयोग में नहीं लाया गया है। खासकर रक्षा, शिपबिल्डिंग और वैल्यू-चेन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। यह दौरा इन संभावनाओं को ठोस साझेदारी में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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