चिरायु की मदद से सीमा अब अपना हाथ सीधा कर पाएगी, डीकेएस अस्पताल में हुई निःशुल्क सर्जरी

रायपुर : 24 अप्रैल 2023

जन्म से ही कॉंट्रेक्चर ऑफ राइट एल्बो से पीड़ित थी सीमा, समस्या से निजात दिलाने चिरायु दल ने किया था रायपुर रिफर |

जन्म से ही कॉंट्रेक्चर ऑफ राइट एल्बो की समस्या से जूझ रही सीमा अब सामान्य बच्चों की तरह अपना हाथ पूरी तरह सीधा कर पाएगी। रायपुर में डीकेएस सुपरस्पेशियालिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने उसके हाथ में एल्बो सॉफ्ट टिसू रिलीज सर्जरी की है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिरायु योजना से हुई इस निःशुल्क सर्जरी ने सीमा का जीवन खुशियों और उमंग से भर दिया है। सारंगढ़ के चिरायु दल की पहल और डीकेएस अस्पताल के डॉक्टरों की मेहनत से उसे मुड़ी हुई कोहनी की समस्या से मुक्ति मिल गई है।


नवगठित सांरगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चिरायु टीम जब स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्राथमिक शाला झिलगिटार पहुंची, तब टीम वहां पढ़ने वाली दस साल की सीमा की समस्या से रू-ब-रू हुई। उसकी दाएं हाथ की कोहनी जन्म से ही 90 डिग्री के एंगल से मुड़ी हुई थी जिसे वह सीधा नहीं कर पाती थी। मेडिकल भाषा में इसे कॉंट्रेक्चर ऑफ राइट एल्बो या डिस्टल ऑर्थोग्रैपोसिस ऑफ राइट एल्बो कहा जाता है। चिरायु दल ने सीमा के परिजनों का मनोबल बढ़ाकर मार्गदर्शन किया और इलाज के लिए रायपुर के डीकेएस सुपरस्पेशियालिटी अस्पताल रिफर किया।
डीकेएस अस्पताल में भर्ती होने के बाद इस साल 16 फरवरी को पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिशियन डॉ. रमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में सीमा की पहली बार सर्जरी/कास्टिंग की गई। कुछ दिनों बाद कास्टिंग ओपन कर सॉफ्टनेस देखा गया। ऑपरेशन के पहले छह बार बुलाकर कास्टिंग की गई। इसके दो माह बाद विगत 11 अप्रैल और 15 अप्रैल को डीकेएस अस्पताल के पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक विभाग में एल्बो सॉफ्ट टिसू रिलीज सर्जरी पूरी की गई।
आमतौर पर निजी अस्पतालों में इस तरह के ऑपरेशन पर बड़ी राशि खर्च हो जाती है। सीमा के हाथ का ऑपरेशन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु योजना के माध्यम से पूर्णतः निःशुल्क हुआ है। इस ऑपरेशन के बाद अब वह सामान्य बच्चों की तरह अपने हाथ को पूरी तरह से सीधा कर पाएगी। सीमा के परिजनों ने चिरायु योजना से ऑपरेशन के लिए राज्य शासन, स्वास्थ्य विभाग और चिरायु टीम को धन्यवाद देते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।
क्रमांक-441/देवराम-कमलेश

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