रविवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और सुकर्म योग का संयोग; राहुकाल में शुभ कार्य करने से बचने की मान्यता
Headlines
- 18 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि
- नवरात्रि में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व
- चंद्रमा धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा
- रविवार को राहुकाल शाम 4:23 से 5:48 बजे तक
- विक्रम संवत 2083 के अनुसार आश्विन मास में धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर
रायपुर। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त इस अवसर पर माता की आराधना कर सुख-समृद्धि, साहस और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं। पंचांग के अनुसार आज सुकर्म योग और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग भी बताया गया है।
18 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: रविवार
- विक्रम संवत: 2083
- मास: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: सप्तमी
- योग: सुकर्म
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा
- करण: वणिज
- चंद्र राशि: धनु
- सूर्य राशि: तुला
- सूर्योदय: सुबह 6:24 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:48 बजे
- चंद्रोदय: दोपहर 1:11 बजे
- चंद्रास्त: रात 11:25 बजे
- राहुकाल: शाम 4:23 से 5:48 बजे तक
- यमगंड: दोपहर 12:06 से 1:31 बजे तक
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। ऊपर दिए गए समय उपलब्ध स्रोत में उल्लिखित समय हैं; रायपुर सहित अपने स्थानीय क्षेत्र के लिए समय की पुष्टि कर लें।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप साहस, शक्ति और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं, दीप प्रज्वलित करते हैं और माता को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करते हैं।
भक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक साधना, संयम और आत्मविश्वास को मजबूत करने का अवसर माना जाता है। पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों का ध्यान रखा जाता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का महत्व
आज चंद्रमा धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहने का उल्लेख पंचांग में किया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र का संबंध दृढ़ संकल्प, प्रयास और लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने से जोड़ा जाता है। इसके अधिष्ठाता देवता वरुण और स्वामी ग्रह शुक्र माने जाते हैं।
इस नक्षत्र में योजनाएं बनाने, जरूरी कार्यों की तैयारी करने और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने को परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है। हालांकि, किसी कार्य के लिए शुभ समय का निर्णय करते समय स्थानीय पंचांग और संबंधित मुहूर्त को देखना उचित रहता है।
राहुकाल में किन बातों का रखें ध्यान?
पंचांग के अनुसार, रविवार को राहुकाल शाम 4:23 बजे से 5:48 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में इस अवधि के दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है। यमगंड का समय दोपहर 12:06 से 1:31 बजे तक बताया गया है।
ये समय धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं। दैनिक जीवन के सामान्य कामकाज के लिए इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित निषेध नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप किसी विशेष पूजा या संस्कार का आयोजन कर रहे हैं, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।


