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म्यूल अकाउंट साइबर अपराध का बड़ा आधार, युवा किसी लालच में न दें बैंक खाता: डीजीपी अरुण देव गौतम.

दुर्ग दौरे पर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक ने साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए किया जागरूक, नशे से दूर रहकर बच्चों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी दिया जोर

Headlines:

  • डीजीपी अरुण देव गौतम ने युवाओं को म्यूल अकाउंट के खतरे से किया आगाह
  • बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए देने पर हो सकती है परेशानी
  • साइबर ठगी की रकम कई खातों से गुजरने के कारण बरामदगी होती है मुश्किल
  • डीजीपी ने बच्चों को खेल, शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की
  • ट्रांसपोर्ट नगर में जरूरत के अनुसार पुलिस थाना खोलने की बात कही
  • खुर्सीपार के दुर्गा पूजा पंडाल में पहुंचकर डीजीपी ने की पूजा-अर्चना

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने युवाओं को साइबर अपराध और बैंक खातों के दुरुपयोग को लेकर सतर्क किया है। शनिवार को दुर्ग दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि म्यूल अकाउंट साइबर धोखाधड़ी का एक बड़ा आधार है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे थोड़े से आर्थिक लालच में आकर अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। ऐसा करना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।

डीजीपी ने बताया कि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम अक्सर कई बैंक खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर की जाती है। इससे पैसों का पता लगाना और उन्हें वापस हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे मामलों में बैंक खाते का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को भी जांच का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता को महत्वपूर्ण बताते हुए नागरिकों से अनजान लोगों के साथ बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा नहीं करने की अपील की।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी या अवैध धन के लेन-देन के लिए करते हैं। कई बार खाताधारक कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपना खाता दूसरों को इस्तेमाल करने देता है। कुछ मामलों में लोगों के खातों का दुरुपयोग उनकी जानकारी के बिना भी किया जा सकता है। ऐसे में युवाओं को किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में रकम प्राप्त करने, उसे दूसरे खाते में भेजने या एटीएम कार्ड और बैंकिंग विवरण सौंपने से बचना चाहिए। किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तुरंत बैंक और संबंधित साइबर अपराध शिकायत तंत्र से संपर्क करना जरूरी है।

नशे से दूर रखने के लिए बच्चों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

डीजीपी अरुण देव गौतम ने नशे और अपराध के संबंध पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बच्चों और युवाओं को खेल, अध्यात्म, शिक्षा तथा अन्य सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, स्कूलों को बच्चों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि पढ़ाई में कठिनाई या असफलता का सामना करने वाले विद्यार्थी शिक्षा से दूर न हों और नशे जैसी समस्याओं की ओर जाने से बच सकें। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार, स्कूल और समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। युवाओं को सही दिशा देने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराने से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

ट्रांसपोर्ट नगर में पुलिस थाना खोलने पर कही यह बात

दुर्ग दौरे के दौरान ट्रांसपोर्ट नगर में पुलिस थाना खोले जाने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि पुलिस थानों की स्थापना आवश्यकता के अनुसार की जाती है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट नगर में भी थाना खोले जाने की बात कही। हालांकि, इसके लिए निर्धारित समयसीमा या अन्य विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।

खुर्सीपार के दुर्गा पंडाल में की पूजा-अर्चना

अपने दौरे के दौरान डीजीपी खुर्सीपार स्थित दुर्गा उत्सव समिति के पंडाल पहुंचे, जहां उन्होंने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर आरती में भाग लिया। उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट की स्थापना के साथ इस क्षेत्र में दुर्गा उत्सव और धार्मिक आस्था के गहरे जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग ने पूरे साल मेहनत कर देश के इस बड़े औद्योगिक संस्थान को स्थापित करने में योगदान दिया है। धार्मिक आयोजन लोगों को एकजुट करने के साथ परिवारों और बच्चों में सदाचार, अनुशासन तथा अच्छे आचरण की भावना विकसित करने में भी भूमिका निभाते हैं।

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