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Monday, June 1, 2026

नहीं रहीं सुरों की मधुर पहचान सुमन कल्याणपुर, संगीत जगत में शोक की लहर…

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मुंबई / महाराष्ट्र

हिंदी और मराठी संगीत जगत की दिग्गज गायिका ने 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, कई पीढ़ियों के दिलों में बसाए थे अपने अमर गीत |

हेडलाइंस

  • प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन
  • हिंदी, मराठी सहित कई भाषाओं में गाए थे सैकड़ों यादगार गीत
  • मधुर आवाज के कारण उन्हें कहा जाता था “दूसरी लता मंगेशकर”
  • पद्म भूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से हो चुकी थीं सम्मानित
  • संगीत जगत और प्रशंसकों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुंबई। भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने रविवार को मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर फैल गई। देशभर के संगीत प्रेमी और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

भारतीय संगीत को दिए कई अमर गीत

सुमन कल्याणपुर ने हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने “ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे”, “तुमने पुकारा हम चले आए”, “आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे”, “मेरा प्यार भी तू है” और “बहना ने भाई की कलाई में” जैसे अनेक लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी में मधुरता, स्पष्टता और भावनात्मक गहराई का अनूठा संगम देखने को मिलता था, जिसने उन्हें करोड़ों श्रोताओं का प्रिय बना दिया।

कई भाषाओं में बिखेरा स्वर का जादू

सुमन कल्याणपुर केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने मराठी, गुजराती, असमिया, भोजपुरी, कन्नड़, पंजाबी, बंगाली और अन्य भारतीय भाषाओं में भी सैकड़ों गीत गाए। बताया जाता है कि उन्होंने अपने लंबे करियर में हिंदी भाषा में ही 850 से अधिक गीतों को स्वर दिया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और शास्त्रीय संगीत पर मजबूत पकड़ ने उन्हें भारतीय संगीत जगत की विशिष्ट हस्तियों में शामिल किया।

‘दूसरी लता मंगेशकर’ के नाम से भी मिली पहचान

संगीत प्रेमियों के बीच सुमन कल्याणपुर की आवाज की तुलना अक्सर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी। उनकी आवाज की मधुरता और बनावट इतनी समान मानी जाती थी कि कई बार श्रोता दोनों की आवाज में अंतर नहीं कर पाते थे। हालांकि सुमन कल्याणपुर ने अपनी विशिष्ट शैली और अद्वितीय प्रस्तुति के बल पर संगीत जगत में अलग मुकाम बनाया और अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित की।

सम्मानों और उपलब्धियों से सजा रहा लंबा संगीत सफर

संगीत क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुमन कल्याणपुर को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान भी प्रदान किया गया था। इसके अलावा उन्हें विभिन्न संगीत संस्थाओं और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट सहित कई सम्मान मिले। उनका संगीत सफर भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी सुमन कल्याणपुर

सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके गीत आज भी रेडियो, मंचों और संगीत प्रेमियों की यादों में जीवंत हैं। उनकी आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी और भारतीय संगीत के स्वर्णिम इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

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