जगदलपुर / छत्तीसगढ़
जमीन संबंधी कार्य कराने के नाम पर पैसे लेने का आरोप, पीड़ित ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई और रकम वापसी की मांग
हेडलाइंस
- बकावंड तहसील क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने पटवारी पर लगाए गंभीर आरोप
- पट्टा, नामांतरण और सीमांकन के नाम पर लाखों रुपये लेने का दावा
- काम नहीं होने और रकम वापस नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी
- एसडीएम ने जांच कर कार्रवाई का दिया आश्वासन
- मांग पूरी नहीं होने पर कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी
जगदलपुर। बस्तर जिले के बकावंड तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मैलबेड़ा और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने एक पूर्व पटवारी पर जमीन संबंधी कार्यों के नाम पर लाखों रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि पट्टा, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व संबंधी दस्तावेज तैयार कराने का भरोसा देकर उनसे रकम ली गई, लेकिन न तो काम पूरे किए गए और न ही पैसे वापस किए गए। आरोपित पटवारी के स्थानांतरण के बाद अब ग्रामीण न्याय और अपनी रकम की वापसी के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
पट्टा और दस्तावेज बनाने के नाम पर वसूली का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार कई वर्षों से लंबित भूमि संबंधी मामलों को शीघ्र निपटाने का आश्वासन देकर उनसे अलग-अलग राशि ली गई। पीड़ित किसानों का आरोप है कि किसी से दस हजार, किसी से तीस हजार तो किसी से पचास हजार रुपये से अधिक तक लिए गए। कई ग्रामीणों का कहना है कि रकम लेने के बाद भी उनके पट्टे, नामांतरण और अन्य दस्तावेज तैयार नहीं किए गए। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे मांगने पर उनके फोन कॉल तक उठाने बंद कर दिए गए।
किसानों ने सुनाई अपनी पीड़ा
पीड़ित किसानों का कहना है कि जमीन संबंधी कार्य उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे, इसलिए उन्होंने कर्ज लेकर, मवेशी बेचकर और अन्य साधनों से पैसे जुटाकर पटवारी को दिए। एक किसान ने बताया कि पट्टा बनवाने के लिए उसने अपने बैलों की जोड़ी तक बेच दी, लेकिन इसके बावजूद उसका कार्य पूरा नहीं हुआ। अन्य ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार आश्वासन दिया गया, लेकिन न तो दस्तावेज बने और न ही जमा की गई राशि वापस मिली।
कई गांवों के ग्रामीण हुए प्रभावित
ग्रामीणों का दावा है कि मैलबेड़ा, रताखंडी, भिरेंडा और कोलावल सहित कई गांवों के लोग इस मामले से प्रभावित हुए हैं। आरोप है कि भूमि संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए लाखों रुपये एकत्र किए गए, लेकिन अधिकांश मामलों में अपेक्षित कार्य नहीं हुए। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
बकावंड के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनीष वर्मा ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है और इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों के बयान लिए जाएंगे और सभी तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें प्रशासन से न्याय की उम्मीद है। उन्होंने मांग की है कि जिन लोगों से पैसे लिए गए हैं, उन्हें उनकी राशि वापस दिलाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
जमीन संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता की मांग
इस पूरे मामले के बाद क्षेत्र में राजस्व संबंधी सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी और शिकायतों के त्वरित निराकरण की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की आर्थिक और प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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