नई दिल्ली / भारत
मुख्य बिंदु :
- मरौदा स्टेशन को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ में शामिल किया गया
- कॉनकोर्स, प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म व पार्किंग का कार्य तेजी से प्रगति पर
- यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
- छत्तीसगढ़ में 32 स्टेशन इस योजना के तहत विकसित किए जा रहे हैं
लोकसभा में दी गई जानकारी: विकास कार्यों को मिली रफ्तार
नई दिल्ली में 26 मार्च 2026 को लोकसभा में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल के प्रश्न के उत्तर में मरौदा रेलवे स्टेशन के विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्टेशन पर पहले से ही प्लेटफॉर्म, शेल्टर, पेयजल, शौचालय और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अब इसे और आधुनिक स्वरूप देने के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हो रहा व्यापक उन्नयन
मरौदा स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चिन्हित किया गया है। यहां कॉनकोर्स, प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म सुधार, पार्किंग और पहुंच मार्ग जैसे कई संरचनात्मक कार्य पूरे हो चुके हैं। साथ ही, प्रकाश व्यवस्था, जन उद्घोषणा प्रणाली, प्रवेश-निकास द्वार और बुकिंग काउंटर के आधुनिकीकरण का कार्य जारी है। स्टेशन से रेलवे फाटक तक स्ट्रीट लाइट लगाने की पहल भी शुरू कर दी गई है, जिससे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी।
राज्य में 32 स्टेशन शामिल, कई पर कार्य पूरा
छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत कुल 32 रेलवे स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है, जिनमें से 5 स्टेशनों—अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई, डोंगरगढ़ और उरकुरा—का कार्य पूरा हो चुका है। बाकी स्टेशनों पर तेजी से काम जारी है। भारतीय रेलवे के अनुसार, स्टेशन विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो यातायात, प्राथमिकता और निधि उपलब्धता के आधार पर आगे बढ़ती है। इसके साथ ही, यात्रियों की सुविधा बढ़ाने, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, दिव्यांगजन सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रेल परियोजनाएं और कनेक्टिविटी में सुधार
दुर्ग-दल्लीराजहरा रेलखंड पर वर्तमान में पर्याप्त ट्रेन सेवाएं संचालित हो रही हैं, वहीं दल्लीराजहरा–रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना पर भी कार्य प्रगति पर है। यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्कता को मजबूत करेगी और आर्थिक गतिविधियों को गति देगी। मार्च 2025 तक इस परियोजना पर 1,028 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 2025-26 के लिए 85 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
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