बस्तर /रायपुर /छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
• DKSZC सदस्य पापाराव ने साथियों संग डाले हथियार
• कुटरु थाना, बीजापुर में हुआ आत्मसमर्पण
• सरकार की पुनर्वास नीति और बढ़ते दबाव का असर
• बस्तर में अब केवल 30–40 माओवादी सक्रिय होने का दावा
बड़े लीडर के सरेंडर से बदली तस्वीर
बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता उस समय सामने आई जब कुख्यात नक्सली लीडर पापाराव ने अपने 18 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। सभी ने कुटरु थाना में अपने हथियार पुलिस के सामने जमा किए, जिसके बाद उन्हें बस के जरिए जगदलपुर भेजा गया। पापाराव नक्सल संगठन में एक बड़ा रणनीतिक चेहरा माना जाता रहा है, ऐसे में उसका मुख्यधारा में लौटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम उपलब्धि मानी जा रही है। यह कदम राज्य सरकार द्वारा तय 31 मार्च की डेडलाइन से पहले मिला एक मजबूत संकेत भी माना जा रहा है।
बयान और कारण: दबाव, मुश्किलें और बदली सोच
आत्मसमर्पण के बाद पापाराव ने कहा कि जंगलों में जीवन लगातार कठिन होता जा रहा था और सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ता जा रहा था। साथ ही सरकार की पुनर्वास नीति ने भी उन्हें प्रभावित किया। उन्होंने भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए कहा कि अब वे आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेंगे। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि अब छत्तीसगढ़ में DKSZC स्तर का कोई बड़ा नक्सली लीडर सक्रिय नहीं बचा है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी के अनुसार, पूरे बस्तर में अब केवल 30 से 40 माओवादी ही सक्रिय हैं।
पृष्ठभूमि: संगठन को गहरा झटका
पापाराव उर्फ सुनम चंदरैय्या, सुकमा का निवासी है और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य रहा है। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज और साउथ सब जोनल ब्यूरो का अहम सदस्य था। वर्ष 2010 के ताड़मेटला कांड में उसकी भूमिका बताई जाती है। ऐसे में उसके आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन को न केवल रणनीतिक बल्कि मनोवैज्ञानिक झटका भी लगा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अन्य नक्सलियों पर भी असर पड़ेगा और वे भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होंगे।
लगातार सरेंडर: 2025 में बढ़ी रफ्तार
साल 2025 में बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जगदलपुर में 210 नक्सलियों का सामूहिक सरेंडर अब तक का सबसे बड़ा मामला रहा, वहीं राजनांदगांव और दंतेवाड़ा समेत कई जिलों में भी बड़ी संख्या में माओवादियों ने हथियार डाले। सरकार की पुनर्वास नीति, बढ़ते ऑपरेशन और संगठन के भीतर असंतोष इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
आगे की राह: शांति की ओर बढ़ते कदम
पुलिस और प्रशासन को उम्मीद है कि बचे हुए माओवादी भी जल्द आत्मसमर्पण करेंगे। पापाराव जैसे बड़े नेता का मुख्यधारा में लौटना बस्तर में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के स्थायी समाधान के लिए विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी होगा।
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