रायपुर / छत्तीसगढ़
अभियान में तेजी, शीर्ष कमांडर भी निशाने पर
देश में नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य के साथ सुरक्षा बलों ने अभियान को और आक्रामक रूप दे दिया है। वर्तमान में करीब 300 नक्सली, जिनमें शीर्ष स्तर के कमांडर भी शामिल हैं, सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार, इन उग्रवादियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संयुक्त ऑपरेशनों के जरिए उन्हें आत्मसमर्पण या कार्रवाई के लिए मजबूर करने की रणनीति अपनाई गई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जो मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास के द्वार खुले हैं, लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी घेराबंदी
जानकारी के मुताबिक दो बड़े कमांडर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमावर्ती पहाड़ी व वन क्षेत्रों में सक्रिय बताए जा रहे हैं। इन इलाकों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की संयुक्त टीमें सघन सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। तकनीकी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस और खुफिया तंत्र के जरिए नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए सुरक्षित गलियारे के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं, जिन्हें अब व्यवस्थित तरीके से बंद किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में घटा प्रभाव, केवल तीन जिले प्रभावित
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए अभियानों और विकास कार्यों के चलते छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभाव सिमटकर अब केवल तीन जिलों तक रह गया है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय समुदायों का भरोसा भी बढ़ा है। सरकार का दावा है कि सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति से हालात तेजी से बदल रहे हैं। हालांकि चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है।
ख़बरें और भी…


