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Wednesday, February 18, 2026

जंगली सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि, आईवीआरआई बरेली की रिपोर्ट के बाद वन विभाग अलर्ट…

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रायपुर / छत्तीसगढ़

रायपुर: छत्तीसगढ़ में जंगली सुअरों की रहस्यमयी मौतों के पीछे अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। बलौदाबाजार और महासमुंद समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में जंगली सुअरों की मौत के बाद उनके सैंपल जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजे गए थे। संस्थान की रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि होने के बाद वन विभाग ने प्रदेशभर में सतर्कता बढ़ा दी है।
वन मुख्यालय ने सभी संबंधित डीएफओ को अलर्ट जारी करते हुए मैदानी अमले को निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। विभाग इस बात को लेकर विशेष सावधानी बरत रहा है कि जंगली सुअरों में फैला वायरस पालतू सूअरों या अन्य वन्य जीवों तक न पहुंचे। पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण पाण्डेय ने भी हालात पर नजर बनाए रखने और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से सूअरों को प्रभावित करती है, हालांकि इसका संक्रमण इंसानों में नहीं फैलता।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कई वन क्षेत्रों में जंगली सुअरों की असामान्य मौतों से हड़कंप मच गया था। इसके बाद वन विभाग ने मृत सुअरों के सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजे थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी, आवाजाही पर नियंत्रण और जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर क्या है?
अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो केवल घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है। यह बीमारी अत्यधिक संक्रामक होती है और संक्रमित पशु के संपर्क, संक्रमित मांस या उपकरणों के जरिए फैल सकती है। वर्तमान वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार यह बीमारी मनुष्यों को संक्रमित नहीं करती, लेकिन पशुपालन क्षेत्र के लिए आर्थिक रूप से बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है।
बचाव और सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार मृत या बीमार सुअरों के संपर्क से बचना, संक्रमित क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही रोकना और पालतू सूअरों को अलग रखना जरूरी है। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध लक्षण की तुरंत सूचना स्थानीय पशु चिकित्सा विभाग को दें। समय पर सतर्कता और निगरानी से ही इस बीमारी के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।

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