रायपुर / छत्तीसगढ़
रायपुर मैट्स विश्वविद्यालय के पंडरी स्थित अंग्रेजी विभाग में “लिटरेरी स्टडीज का भविष्य: अंतर्विषयकता, प्रौद्योगिकी और वैश्विक जुड़ाव” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट शिक्षाविद् डॉ. सुपर्णा कारकुण ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने साहित्यिक अनुसंधान के विस्तारित अंतर्विषयक दायरे पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान समय में साहित्य सांस्कृतिक अध्ययन, समाजशास्त्र, मीडिया, चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों से गहराई से जुड़ रहा है।
अपने व्याख्यान में डॉ. कारकुण ने शोधार्थियों को डिजिटल मानविकी और चिकित्सा मानविकी जैसे उभरते क्षेत्रों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपकरण मौखिक परंपराओं को डिजिटल अभिलेखागार के रूप में संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने साहित्य को किसी भी अध्ययन और अनुसंधान के केंद्र में रखते हुए इको-फेमिनिज्म और क्लाइमेट फिक्शन जैसे समकालीन दृष्टिकोणों पर भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लेखन करते समय पाठकों की संवेदनशीलता और अपेक्षाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना दास सरखेल ने पुस्तकों और पठन संस्कृति के स्थायी महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आलोचनात्मक सोच और गहन अध्ययन की आवश्यकता पर जोर देते हुए छात्रों को मूल ग्रंथों के अध्ययन तथा विद्वतापूर्ण पठन से जुड़ाव मजबूत करने की सलाह दी। साथ ही शैक्षिक कार्यों में एआई उपकरणों के संतुलित और विचारशील उपयोग की भी अपील की गई। व्याख्यान के अंत में आयोजित इंटरएक्टिव सत्र में छात्रों और शोधकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने प्रश्न साझा किए। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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