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Wednesday, February 4, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत दी…

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रायपुर/नई दिल्ली/भारत

सुप्रीम कोर्ट ने आज कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ के विवादित शराब घोटाला मामलों में अंतरिम जमानत (interim bail) प्रदान कर दी है।

यह जमानत दोनों मामलों — एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) और राज्य की इकोनॉमिक ऑफ़ेन्सस विंग (EOW) द्वारा दर्ज धनशोधन और भ्रष्टाचार मामलों — में दी गई है। लखमा 15 जनवरी 2025 को ED ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था और बाद में 2 अप्रैल 2025 को EOW/ACB ने अलग से गिरफ़्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अब तक की लगभग 378 दिनों की हिरासत का विशेष उल्लेख करते हुए अंतरिम राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की बेंच — मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली — ने यह राहत देते हुए कहा कि अभियोजन के प्रस्तावित हज़ारों गवाहों की परीक्षा के कारण ट्रायल जल्दी समाप्त नहीं होगा, इसलिए अनंतकाल तक हिरासत रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लखमा को चोटिल साक्ष्य छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने से रोकने के लिए सख्त शर्तों के साथ यह जमानत दी जा रही है।

जमानत की शर्तों में सुप्रीम कोर्ट ने यह शामिल किया है कि लखमा छत्तीसगढ़ में तब तक नहीं रह सकते जब तक कि उन्हें विशेष कोर्ट की सुनवाई में पेश होना न हो, उनका पासपोर्ट जमा करना होगा, वे परिचालन कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे (स्वास्थ्य कारणों को छोड़कर), और उन्हें अपना फोन नंबर जांच एजेंसियों और कोर्ट को देना होगा तथा इसे बिना अनुमति बदला नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि वे राज्य विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार नहीं मानती और उन्हें जांच के दौरान किसी भी प्रकार की टिप्पणी या बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।

इस फैसले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को “सत्य की विजय” बताते हुए लखमा के पक्ष में बयान दिया है, और इसे उनकी लोकप्रियता और आदिवासी लोगों के हित का प्रतिनिधित्व बताया है। मामला 2019-22 के बीच के शराब नीति विवादित अनुबंधों और कथित राज्य को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार घोटाले से लगभग हज़ारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, और इसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के परिजन भी आरोपित हैं।

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