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Wednesday, February 11, 2026

गुड गवर्नेंस कागजों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…

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  • मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 में 5 जिले और 5 विभाग सम्मानित
  • 25 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की निगरानी हेतु ई-प्रगति पोर्टल लॉन्च
  • तकनीक, पारदर्शिता और नवाचार पर आधारित सुशासन का रोडमैप प्रस्तुत

सुशासन का अर्थ परिणाम और विश्वास

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस केवल फाइलों या भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखना चाहिए। नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सफलता तब मानी जाएगी, जब अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। इस अवसर पर सुशासन एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 जिलों और 5 विभागों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से राज्य की 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी निर्माण परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से की जाएगी।

तकनीक से सशक्त प्रशासन और पारदर्शिता

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सेवाएँ एक ही स्थान पर मिल रही हैं। ई-प्रगति पोर्टल, ई-ऑफिस, ऑनलाइन परमिट, जेम पोर्टल और डिजिटल भुगतान जैसी पहलें प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए गए हैं, पुराने नियम हटाए गए हैं और प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ऑफिस के माध्यम से अब फाइलें महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक में आगे बढ़ रही हैं, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएँ घटी हैं और कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आया है।

नवाचार से विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा

मुख्यमंत्री ने कहा कि दंतेवाड़ा की ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख प्रणाली, जशपुर की ‘निर्माण जशपुर’, गरियाबंद का हाथी ट्रैकिंग ऐप, नारायणपुर का इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की पोषण पहल जैसे नवाचार यह साबित करते हैं कि छत्तीसगढ़ में शासन अब परिणाम-आधारित हो चुका है। विभागीय स्तर पर विद्या समीक्षा केंद्र, सिंगल विंडो सिस्टम, ई-कुबेर डिजिटल भुगतान और मनरेगा में QR कोड आधारित पारदर्शिता जैसे प्रयास सुशासन की नई संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पहल’ और ‘प्रेरणा’ योजनाओं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और LSG-2.0 के माध्यम से नागरिक सहभागिता और सेवा वितरण को और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2030 के तहत राज्य समृद्ध, विकसित और नागरिक-केंद्रित प्रशासन का उदाहरण बनेगा।

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