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Wednesday, February 11, 2026

रूआबांधा मैदान पर निर्माण योजना से टकराव, 5 दिन से धरने पर बैठे बस्तीवासी…

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रिसाली नगर निगम क्षेत्र के रूआबांधा मैदान में प्रस्तावित आवासीय–व्यावसायिक परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर बस्तीवासी अपने वर्षों पुराने घरों और सामुदायिक स्थलों को बचाने के लिए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, वहीं गृह निर्माण मंडल का दावा है कि परियोजना पूरी तरह वैधानिक है और किसी का घर बिना न्यायालय के आदेश के नहीं तोड़ा जाएगा।

निर्माण योजना से उपजा विवाद, धरने पर बैठे स्थानीय निवासी

दुर्ग–पाटन रोड स्थित भिलाई नगर के रूआबांधा मैदान में इन दिनों असमंजस और तनाव का माहौल है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल वृत्त दुर्ग द्वारा तालपुरी ब्लॉक–3 के तहत आवासीय एवं व्यावसायिक परिसर निर्माण की योजना शुरू की गई है, जिसका स्थानीय बस्तीवासी कड़ा विरोध कर रहे हैं। बीते पांच दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने में शामिल लोगों का कहना है कि सरकारी योजना की आड़ में उनकी वर्षों पुरानी बसाहट को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। बस्तीवासियों के अनुसार, यहां रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उन्होंने अपने सीमित संसाधनों से घर बनाए हैं।

पट्टा, आश्वासन और उजड़ती बसाहट का दर्द

रूआबांधा बस्ती के निवासी राजेंद्र प्रसाद चंदन, राजेंद्र रजक सहित अन्य प्रभावितों का दावा है कि उन्हें वर्ष 1998 में आवासीय पट्टा दिया गया था, जिसके आधार पर उन्होंने मकान निर्मित किए। उनका आरोप है कि हाल ही में 57 घरों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है, जो केंद्रीय शहरी आवास राज्य मंत्री के उस बयान के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि किसी भी गरीब परिवार को वंचित नहीं किया जाएगा। बस्तीवासियों का यह भी कहना है कि वर्ष 2015 में निर्मित 25–30 सीटर सुलभ शौचालय, बच्चों का एकमात्र खेल मैदान, साप्ताहिक बाजार स्थल और मंदिर भी इस निर्माण की जद में आ रहे हैं, जिससे सामाजिक और धार्मिक जीवन प्रभावित होगा।

गृह निर्माण मंडल का स्पष्टीकरण और न्यायालय का भरोसा

वहीं, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल वृत्त के उपायुक्त आर.के. राठौर ने बस्तीवासियों के आरोपों को भ्रामक बताया है। उनके अनुसार, यह भूमि विधिवत रूप से बीएसपी से खरीदी गई है और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति, भवन अनुज्ञा तथा रेरा पंजीकरण के बाद ही परियोजना शुरू की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 57 नहीं, बल्कि केवल 18 घर ही अतिक्रमण की जद में आते हैं और यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट के आदेश के बिना किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। मंडल का यह भी कहना है कि परियोजना के तहत 3.75 एकड़ में 321 यूनिट—280 आवासीय और 41 व्यावसायिक—का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे 150 से 200 परिवारों को लाभ मिलेगा। फिलहाल सामने की खाली जमीन पर ही काम शुरू होगा और प्रभावितों को न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही राहत दी जाएगी।

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