दुर्ग/छत्तीसगढ़
बाजार में नकली नोटों की दस्तक
दुर्ग जिले के रानीतराई गांव के साप्ताहिक बाजार में नकली नोटों के चलन की सूचना से हड़कंप मच गया। 60 रुपये की सब्जी खरीदकर 500 रुपये का नोट देने वाले पति-पत्नी अरुण तुरंग और राखी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शिकायत सब्जी विक्रेता तुलेश्वर सोनकर ने दर्ज कराई, जिन्हें नोट के नकली होने का अंदेशा स्थानीय व्यापारियों द्वारा दी गई चेतावनी के बाद हुआ। जांच में पता चला कि आरोपी रायपुर जिले के सोनपैरी गांव के निवासी हैं और इससे पहले पाटन और पाटन क्षेत्र के पाटन बाजार में भी नकली नोट खपाने का प्रयास कर चुके थे। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने बाजार में संभावित बड़े नुकसान को टाल दिया।
प्रिंटर से कट रहा था ‘करंसी’ का रास्ता
पुलिस पूछताछ में अरुण ने नकली नोट छापने और बाजार में इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की। उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कलर प्रिंटर, फोटो कॉपी मशीन और विशेष पेपर मंगाकर 500, 200 और 100 रुपये की मुद्रा में फर्जी नोट तैयार किए। तकनीकी जांच में सामने आया कि नोटों की कटिंग, कलर ग्रेड और पेपर फिनिश वास्तविक मुद्रा की नकल करने के उद्देश्य से की गई थी ताकि स्थानीय दुकानदारों को तुरंत पहचान में न आए। अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के अपराधों में सस्ते उपकरणों के जरिए भी उच्च-गुणवत्ता की नकल तैयार करना चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि यह छोटे बाजारों में तेजी से फैल सकता है।
घर में मिला नकली नोटों का जखीरा
पुलिस ने आरोपी के आवास से प्रिंटर, फोटो कॉपी मशीन, पेपर और कुल 1,65,300 रुपये के नकली नोट बरामद किए। जब्त नोटों में 500, 200 और 100 रुपये के मूल्य के फर्जी नोट शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नकली नोटों को ग्रामीण बाजारों, छोटे कस्बों और साप्ताहिक हाटों में खपाने की योजना पर काम कर रहा था, जहां नकली मुद्रा पहचानने के संसाधन सीमित होते हैं। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि नकली मुद्रा का प्रसार स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम व्यापारियों के भरोसे को सीधा नुकसान पहुंचाता है।
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