रायपुर/ छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन केंद्रों पर लागू पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली, त्वरित भुगतान और बेहतर प्रबंधन के चलते धान विक्रय की प्रक्रिया अब पहले से अधिक सरल, सुगम और किसान-हितैषी बन गई है। राज्यभर के किसान ‘किसान तुंहर टोकन’ ऐप के माध्यम से घर बैठे टोकन प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उन्हें उपार्जन केंद्रों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं
सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भिट्ठी कला के किसान गुलाब राम राजवाड़े ने बताया कि इस वर्ष उनकी धान की उपज अच्छी हुई है और उनके पास कुल 109 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने डिजिटल माध्यम से 90.60 क्विंटल धान का पहला टोकन ऑनलाइन कटवाया। धान विक्रय के मात्र 48 घंटे के भीतर ही समर्थन मूल्य की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा हो गई, जिससे उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिली। उन्होंने 16 क्विंटल धान का दूसरा टोकन भी मोबाइल के माध्यम से आसानी से कटवा लिया और पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत नहीं आई।
किसान गुलाब राम ने बताया कि टोकन के अनुसार जब वे उपार्जन केंद्र पहुंचे तो तुरंत गेट पास जारी किया गया, नमी परीक्षण कराया गया और बारदाना भी उपलब्ध करा दिया गया। धान विक्रय के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। साथ ही केंद्रों पर पेयजल, बैठने और छांव जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। उनका कहना है कि डिजिटल व्यवस्था के चलते समय, श्रम और खर्च—तीनों की बचत हो रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों को धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है, जिससे किसानों को व्यापक आर्थिक लाभ मिल रहा है। प्राप्त राशि का उपयोग वे कृषि उपकरण खरीदने के साथ ही गेहूं, सब्जी और अन्य फसलों की खेती में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
अंत में किसान गुलाब राम राजवाड़े ने वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि डिजिटल, पारदर्शी और सुगम प्रणाली के चलते किसान वर्ग में संतोष और उत्साह का माहौल बना हुआ है।
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