रायपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए जिला अध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है । रायपुर , दुर्ग और सरगुजा में किए गए प्रमुख बदलाव आने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं । क्या यह कदम 2025 की तैयारी का हिस्सा है ?
रायपुर में नई टीम , शहर और ग्रामीण दोनों में बदले समीकरण रायपुर शहर Congress की कमान अब पूर्व पार्षद श्री कुमार मेनन को दी गई है । संगठन के भीतर मेनन को एक शांत , जमीन से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता है । नियुक्ति के बाद कई कार्यकर्ताओं ने इसे “कार्यकर्ता-आधारित चयन” बताया । ग्रामीण रायपुर में अध्यक्ष की जिम्मेदारी राजेंद्र पप्पू बंजारे को मिली है , जिन्हें गांव-स्तर पर मजबूत पकड़ और सामुदायिक जुड़ाव के लिए जाना जाता है । उनकी तिपरा-स्तरीय सक्रियता के चलते पार्टी उन्हें एक “संवेदनशील और जन-संपर्क भाव वाले नेता” के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है ।



एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा— “इस बार संगठन ने वास्तविक फील्डवर्क को प्राथमिकता दी है । इससे बूथ स्तर पर ऊर्जा बढ़ेगी.”
सरगुजा सिंहदेव का भरोसा बरकरार , बालकृष्ण पाठक दोबारा नियुक्त सरगुजा में स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के करीबी बालकृष्ण पाठक को फिर से जिला अध्यक्ष बनाया गया है । उनकी दोबारा नियुक्ति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि पार्टी यहां निरंतरता और स्थिरता के फार्मूले पर काम करना चाहती है । पार्टी सूत्रों का कहना है कि सरगुजा में पाठक का संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत है और पिछले कार्यकाल में उनकी सक्रियता ने उन्हें दोबारा मौका दिलाया ।
दुर्ग में युवा और अनुभवी नेतृत्व का मिश्रण दुर्ग शहर अध्यक्ष के रूप में पूर्व मेयर धीरेज बाकलीवाल की नियुक्ति को कांग्रेस का “अनुभव पर भरोसा” माना जा रहा है । बाकलीवाल नगर निगम की राजनीति में एक लोकप्रिय नाम हैं और उन्हें शहर संगठन को मजबूत करने का जिम्मा मिला है । दूसरी ओर , ग्रामीण दुर्ग की कमान राकेश ठाकुर को दी गई है , जिनका आधार मुख्य रूप से किसानों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच मजबूत माना जाता है । एक वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी की— “दुर्ग में यह संयोजन पार्टी को शहर और गांव दोनों में संतुलन दिलाएगा.”
क्या ये बदलाव 2025 की बड़ी रणनीति का हिस्सा ? विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की यह नई जिला नेतृत्व सूची आगामी राजनीतिक परिस्थितियों की तैयारी का संकेत है । पार्टी अब “जमीनी पकड़ + कार्यकर्ताओं की सक्रियता” वाले फार्मूले पर आगे बढ़ रही है । कई राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि कांग्रेस प्रदेश में संगठनात्मक अनुशासन मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है ।
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