स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क
रायपुर। कचना अमलतास रेसीडेंसी स्थित श्री मुनि सुब्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर वर्तमान शासन नायक भगवान श्री 1008 महावीर स्वामी के 2552वें मोक्ष कल्याणक (निर्वाण दिवस) का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण गूंज उठा, जहां भक्तों ने प्रभु महावीर का जलाभिषेक, शांति धारा और पूजन कर पुण्य अर्जित किया।

(श्री मुनि सुब्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस पर पूजन व दीपोत्सव करते श्रद्धालु)
निर्वाण लड्डू समर्पण और गौतम स्वामी पूजन से गूंजी श्रद्धा
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर के जलाभिषेक एवं शांति धारा से हुआ, जिसके पश्चात भक्तों ने सामूहिक रूप से भगवान की पूजन की। तत्पश्चात गौतम स्वामी पूजन संपन्न हुआ और निर्वाण लड्डू समर्पित किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में शांति धारा का पुण्य अर्जन प्रणय जैन, अनिल जैन परिवार एवं कमल कुमार, विपिन कुमार, संस्कार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं, निर्वाण लड्डू समर्पित करने का सौभाग्य नरेंद्र जी व अशोक कुमार जी पालीवाल परिवार को मिला।
भगवान महावीर ने अमावस्या को बना दिया शुभ तिथि
मंदिर समिति के अध्यक्ष हिमांशु जैन ने जानकारी दी कि यह आयोजन जैन धर्म के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वहीं, जानकारी देते हुए सुरेश मोदी ने बताया कि आज के ही दिन भगवान महावीर स्वामी ने कार्तिक कृष्ण अमावस्या को योग-निरोध धारण करते हुए मोक्ष प्राप्त किया था। अमावस्या जैसी अशुभ तिथि को उन्होंने अपने त्याग और तपस्या से शुभ बना दिया। यही कारण है कि यह तिथि मोक्ष कल्याणक दिवस के रूप में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
दीपोत्सव और केवल ज्ञान की ज्योति से प्रकाशित हुआ मंदिर परिसर
इस दिन भगवान महावीर के प्रमुख शिष्य गौतम गणधर स्वामी को भी केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसी ज्ञान ज्योति के उपलक्ष्य में दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों दीपों से मंदिर परिसर जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि जैसे गौतम स्वामी को ज्ञान की ज्योति प्राप्त हुई, वैसे ही हमें भी आत्मज्ञान की रोशनी मिले।
आयोजकों ने दी शुभकामनाएं
आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने इस अवसर को आत्मचिंतन और शांति के संदेश के रूप में मनाया। समिति की ओर से सभी भक्तों को मोक्ष कल्याणक पर्व की शुभकामनाएं दी गईं और भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के संदेशों का पालन करने का संकल्प लिया गया।
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