स्वतंत्र छत्तीसगढ़
रायपुर: 09 अक्टूबर 2025— छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण से जुड़ा नन अरेस्ट मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह वही बहुचर्चित प्रकरण है जिसमें बीते महीने दो ननों और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। अब यह मामला राज्य महिला आयोग के समक्ष गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां तीसरी सुनवाई में भी आरोपी पक्ष अनुपस्थित रहा।
नारायणपुर की तीन आदिवासी युवतियों ने महिला आयोग के सामने बयान दिया कि जब उन्हें जीआरपी थाना लाया गया था, तब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ छेड़छाड़, गाली-गलौज और गैंगरेप की धमकी तक दी। हैरानी की बात यह है कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ। पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें बार-बार धमकाया गया और एक महिला ने उनके साथ मारपीट भी की। मामले में राज्य महिला आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बताया कि 20 अगस्त को पहली सुनवाई में तीनों पीड़िताएं व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुई थीं, लेकिन आरोपी पक्ष तीसरी बार भी अनुपस्थित रहा। उन्होंने कहा कि “बार-बार पेशी से बचना न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना है,” और इसे गंभीर लापरवाही बताया।
आयोग को डीआरएम कार्यालय से केवल एक गेट की सीसीटीवी फुटेज वाली पेनड्राइव सौंपी गई है। डॉ. नायक ने इस पर सवाल उठाया— “क्या पूरे दुर्ग रेलवे स्टेशन में सिर्फ एक ही कैमरा लगा है? यह स्पष्ट रूप से साक्ष्य छिपाने की कोशिश है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रेलवे और जीआरपी पूरी फुटेज प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो आयोग सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कार्रवाई करेगा। इस बीच, जीआरपी और डीआरएम दोनों ही एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। डीआरएम का कहना है कि मामला जीआरपी के अधीन है, जबकि जीआरपी इसे रेलवे प्रशासन का विषय बता रही है।
आयोग की सुनवाई के दौरान भीम आर्मी और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि भी पीड़िताओं के साथ मौजूद थे। कम्युनिस्ट पार्टी के असिस्टेंट सेक्रेटरी फूल सिंह कचलाम ने कहा— “हम तीसरी बार आयोग पहुंचे, लेकिन अनावेदक पक्ष एक बार भी नहीं आए। यह साफ है कि वे मामले को गुमराह कर रहे हैं। यदि हम नहीं आते तो हमें तुरंत नोटिस भेजा जाता, तो फिर इन्हें क्यों छूट दी जा रही है?”
कचलाम ने आगे बताया कि पीड़िताओं ने राज्यपाल को पत्र लिखकर महिला आयोग की तीन सदस्याओं को हटाने की मांग भी की है, आरोप लगाते हुए कि वे आरोपी पक्ष का बचाव कर रही हैं। वहीं भीम आर्मी नारायणपुर जिला महासचिव प्रभाकर सोनी ने आरोप लगाया कि “अनावेदक सत्ता के बल पर तीन बार पेशी से बच निकले हैं और प्रशासन मामले को लगातार दबाने की कोशिश कर रहा है।”
डॉ. किरणमयी नायक ने स्पष्ट किया कि अब आयोग कठोर रुख अपनाएगा। उन्होंने कहा— “रेलवे अधिकारी या तो गुमराह कर रहे हैं या फिर कुछ छिपा रहे हैं। यदि पूरी फुटेज नहीं दी गई तो आयोग स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करेगा।”
दुर्ग का यह नन अरेस्ट मामला पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रह चुका है। मानव तस्करी, धर्मांतरण और पुलिस की भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ आई थीं। अब जब आरोपी पक्ष बार-बार पेशी से गायब है और साक्ष्य छिपाने के आरोप लग रहे हैं, तो यह मामला एक बार फिर रायपुर से लेकर दिल्ली तक चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
महिला आयोग की सख्ती, रेलवे और जीआरपी की कथित लापरवाही, और आरोपी पक्ष की अनुपस्थिति – इन तीन बिंदुओं ने दुर्ग नन अरेस्ट मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि आयोग अपने अगले कदम में क्या कार्रवाई करता है और क्या यह मामला एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ता है।
ख़बरें और भी…follow करना न भूलें|


