नई दिल्ली: 21 अगस्त 2025;
इलाज के दौरान मरीजों को दी जाने वाली कैथेटर सुविधा अब उनके लिए खतरे का कारण भी बन रही है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ताजा स्टडी में सामने आया है कि अस्पतालों में लगाए जाने वाले कैथेटर से मरीजों में खून का गंभीर संक्रमण फैल रहा है। इसे मेडिकल भाषा में सेंट्रल लाइन-एसोसिएटेड ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन (CLABSI) कहा जाता है।
यह संक्रमण खून के जरिए खतरनाक कीटाणुओं को शरीर में फैला देता है, जो अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं के असर से भी बच जाते हैं। एम्स की स्टडी को द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2024 के बीच देशभर के 54 अस्पतालों की 200 आईसीयू यूनिट्स से जुटाए गए आंकड़ों में 8,629 मामलों में ब्लड इंफेक्शन की पुष्टि हुई। औसतन हर 1,000 सेंट्रल लाइन-डे पर 8.83 मरीज संक्रमण का शिकार हुए। सबसे ज्यादा मामले कोविड-19 महामारी के दौरान (2020-21) दर्ज किए गए, जब अस्पतालों पर मरीजों का दबाव और स्टाफ की कमी थी।
स्टडी में पाया गया कि संक्रमण की बड़ी वजह आईसीयू में भीड़, साफ-सफाई के नियमों की अनदेखी और कैथेटर से जुड़ी सावधानियों का पालन न करना है। इससे न केवल मरीजों का अस्पताल में रहने का समय बढ़ता है बल्कि इलाज का खर्च भी कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैथेटर का उपयोग सोच-समझकर और जरूरी सावधानियों के साथ किया जाए, स्टाफ को उचित प्रशिक्षण दिया जाए और संक्रमण रोकथाम के सख्त नियम लागू हों, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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