दिल्ली : 08 अगस्त 2025
दिल्ली विधानसभा ने शुक्रवार को निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली रोकने के लिए ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक 2025’ को बहुमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे अभिभावकों के अधिकारों का पहरेदार बताते हुए कहा कि यह कानून शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा और लाखों अभिभावकों को राहत देगा।
तीन बड़े प्रावधानों से अभिभावकों को राहत
- फीस वृद्धि पर रोक और पारदर्शिता: कोई भी निजी स्कूल लोकेशन, सुविधाएं, खर्च और शिक्षण स्तर की जानकारी दिए बिना फीस नहीं बढ़ा सकेगा। नियम तोड़ने पर 1 से 10 लाख रुपये तक जुर्माना और बार-बार उल्लंघन पर मान्यता रद्द या सरकारी संचालन का प्रावधान।
- तीन-स्तरीय नियामक प्रणाली: स्कूल स्तर की समिति, जिला स्तर पर शिक्षा निदेशक की समिति और राज्य स्तर पर स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण।
- अभिभावकों की सहमति अनिवार्य: स्कूल समिति के पांच अभिभावकों में से एक भी फीस वृद्धि का विरोध करेगा तो फीस नहीं बढ़ेगी।
सीएम का विपक्ष पर हमला
रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासन में शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार में डूबी रही। अधूरी इमारतें, शिक्षक नियुक्तियों में लापरवाही और क्लासरूम घोटाले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “या तो सेवा करो, या सजा भुगतो।” शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि 10% फीस वृद्धि का दावा गलत है और यह कानून 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा। इससे दिल्ली के 1,677 निजी स्कूलों और 18 लाख बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा।
श्रमिक नीतियों पर सीएजी रिपोर्ट से हमला
सीएम ने सीएजी की 31 मार्च 2023 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूर्व सरकार पर श्रमिक कल्याण फंड के 5200 करोड़ रुपये खर्च न करने का आरोप लगाया। मजदूर सहायता, टूल खरीद, पेंशन, चिकित्सा सहायता जैसी योजनाओं का लाभ न मिलने की बात भी उठाई।
जीएसटी संशोधन विधेयक पास:
सदन ने दिल्ली वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025 भी पारित किया। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट की समय सीमा बढ़ाने, पंजीकरण-रिटर्न प्रक्रिया सरल करने, जीएसटी अपीलीय अधिकरण शुरू करने और एमनेस्टी स्कीम लागू करने जैसे प्रावधान हैं। अपील के लिए जमा राशि 10% से घटाकर 7% की गई है। गुटखा कारोबार में यूनिक कोड और मशीन ट्रैकिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी। एमनेस्टी स्कीम से 31 मार्च 2025 तक 218 करोड़ रुपये की वसूली हुई।
करीब तीन घंटे चली चर्चा के बाद 41 वोट पक्ष में और 17 विरोध में पड़े। सीएम ने कहा, “दिल्ली के अभिभावकों का 52 साल का बनवास खत्म हुआ।”
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