रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स:
• प्रदेश में हर एफआईआर की डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू
• 30 दिन में शिकायत न सुलझे तो सिस्टम में अलार्म
• 255 अवैध ऑनलाइन गैंबलिंग लिंक और पोर्टल ब्लॉक
• 165 फर्जी सिम जारी करने वाले पीओएस संचालक गिरफ्तार
• गौ-वंश तस्करों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई
डिजिटल अपराध समीक्षा एप्लीकेशन से विवेचना में तेजी
विजय शर्मा ने संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब प्रदेश में दर्ज होने वाली प्रत्येक एफआईआर की डिजिटल निगरानी की जा रही है। पहले अपराध समीक्षा हाथ से लिखकर की जाती थी, जिससे विवेचना में देरी होती थी, लेकिन अब राज्य की अभिनव पहल के तहत विकसित ‘अपराध समीक्षा एप्लीकेशन’ के माध्यम से एफआईआर का विश्लेषण, समय-सीमा में जांच और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित पर्यवेक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पुलिस प्रशासन को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे आम नागरिकों को त्वरित न्याय की उम्मीद मजबूत होगी।
ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम: 30 दिन में समाधान अनिवार्य
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है, जो देश में अपनी तरह का एक विशिष्ट उदाहरण है। पीएचक्यू में शिकायत दर्ज होते ही वह संबंधित एसपी, डीएसपी और थाना स्तर तक तुरंत पहुंच जाती है। यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान नहीं होता, तो सिस्टम में स्वतः अलार्म सक्रिय हो जाता है, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है। इस व्यवस्था से लंबित प्रकरणों में तेजी आई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ और डीजी (जेल) हिमांशु गुप्ता भी मौजूद रहे और उन्होंने इसे प्रशासनिक सुधार की महत्वपूर्ण पहल बताया।
साइबर अपराध, नशा तस्करी और गौ-वंश अपराध पर सख्त कार्रवाई
NDPS Act के तहत नशे के अवैध कारोबार पर लगातार कार्रवाई जारी है। राज्य में संचालित अनधिकृत ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफार्म पर पहली बार सख्त कदम उठाते हुए 255 ऑनलाइन लिंक और पोर्टल्स को ब्लॉक किया गया है। साइबर अपराधियों के बैंक खातों को सीज किया गया तथा फर्जी सिम जारी करने वाले 165 पीओएस संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही गौ-वंश तस्करों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 19 आदतन आरोपियों की सूची तैयार कर उनकी सतत निगरानी की जा रही है। गौ-वंश वध, अवैध परिवहन और व्यापार से जुड़े मामलों में 142 वाहनों को राजसात किया गया, जिनमें से 27 वाहनों की नीलामी भी की जा चुकी है।
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