📍 रायपुर | 22 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ में आज दोपहर कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 33 जिलों में आर्थिक नाकेबंदी और चक्काजाम किया। सरगुजा, बस्तर, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर संभाग में सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
✊ कांग्रेस का आरोप: सत्ता का दुरुपयोग, कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध
कांग्रेस का कहना है कि ईडी द्वारा चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी “तानाशाही और सत्ता के दुरुपयोग” का उदाहरण है। कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए केंद्र सरकार और ईडी पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया है।
🔥 रायपुर में VIP रोड सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन
वीआईपी चौक (श्रीराम मंदिर, करंसी टॉवर के पास)
धरसींवा और धनेली में नेशनल हाईवे ब्लॉक
तेलीबांधा से मैग्नेटो मॉल रोड पर अवरोध
आजाद चौक खरोरा, तिल्दा (दीनदयाल उपाध्याय चौक), और अभनपुर में भी प्रदर्शन
भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन लागू
🚧 बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, मनेंद्रगढ़ सहित अन्य जिलों में भी चक्काजाम
बिलासपुर: सकरी-पेंड्रीडीह फ्लाईओवर के नीचे चक्काजाम, रायपुर-बिलासपुर मार्ग प्रभावित
दुर्ग: सबसे अधिक 6 स्थानों पर चक्काजाम
कोरबा (कटघोरा): पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल और अन्य नेताओं के नेतृत्व में टायर जलाकर विरोध
मनेंद्रगढ़: भारी बारिश के बीच एनएच-43 जाम, केंद्र सरकार और अडाणी के खिलाफ नारेबाजी
जगदलपुर (आमागुड़ा चौक): रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर यातायात प्रभावित
🛑 स्कूल बस और एम्बुलेंस को मिली छूट, लेकिन आमजन बेहाल
राज्यभर में हुए इस अचानक चक्काजाम के चलते हजारों वाहन फंसे, आम लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। हालांकि स्कूल बसों और एम्बुलेंस को मार्ग पार करने की अनुमति दी गई। व्यापारिक संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन नहीं दिया, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने आर्थिक नाकेबंदी से असहमति जताई है।
👨⚖️ गिरफ्तारी का मामला क्या है?
18 जुलाई को भिलाई से ईडी ने भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 22 जुलाई तक ईडी की रिमांड पर भेजा है।
🔒 कांग्रेस का ऐलान
प्रदेश कांग्रेस ने साफ किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। यदि “तानाशाही रवैया” नहीं रुका, तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।
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