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अजीत जोगी की प्रतिमा हटाने पर बवाल: अमित जोगी ने सरकार और प्रशासन पर बोला हमला…

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रायपुर: 09 जून 2025

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की प्रतिमा को हटाने को लेकर उपजे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 25 मई की रात कुछ लोगों ने एक स्थानीय अधिकारी के साथ शराब पार्टी की और फिर अजीत जोगी की मूर्ति को हाइड्रा मशीन से उखाड़ कर कचरे में फेंक दिया गया।

अमित जोगी ने इसे न केवल एक आदमकद मूर्ति का अपमान, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और अजीत जोगी को चाहने वाले करोड़ों लोगों की आत्मा पर चोट बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना को दो सप्ताह से अधिक हो चुके हैं, लेकिन न तो प्रतिमा को पुनर्स्थापित किया गया है और न ही दोषियों को गिरफ्तार किया गया है।

तीन बिंदुओं पर अमित जोगी का सवाल

  1. रात्रि में मूर्ति हटाना क्यों?
    अमित जोगी ने सवाल किया कि अगर किसी को अजीत जोगी की प्रतिमा से आपत्ति थी तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए था। चोरी-छिपे आधी रात को प्रतिमा हटाना असंवैधानिक और असामाजिक है।
  2. निजी भूमि पर क्यों कार्रवाई?
    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिमा किसी सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर नहीं, बल्कि जोगी परिवार की निजी भूमि पर स्थापित थी। ऐसे में बिना अधिकार और वैधता के यह कार्रवाई अवैधानिक है।
  3. भ्रामक प्रस्ताव का आरोप:
    जोगी ने कहा कि यह तर्क कि नगर पालिका ने वहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव पारित किया था, सरासर झूठ है। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव टीकर बायपास के लिए था, न कि ज्योतिपुर चौक के लिए।

प्रतिमा निर्माण की पृष्ठभूमि

अमित जोगी ने जानकारी दी कि उक्त भूमि पर अजीत जोगी की प्रतिमा व उद्यान के निर्माण के लिए रेणु जोगी ने विधायक निधि से ₹3.5 लाख जारी किए थे। निर्माण की जिम्मेदारी नगर पालिका गौरेला को दी गई थी। प्रतिमा जोगी परिवार द्वारा निजी रूप से बनवाई गई थी और उसे चबूतरे पर स्थापित किया गया था।

सरकार और भाजपा पर निशाना

अमित जोगी ने मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और भाजपा नेताओं से सवाल किया कि क्या वे अपनी निजी भूमि पर किसी बाहरी व्यक्ति को प्रतिमा लगाने देंगे? उन्होंने कहा कि यह मामला संविधान, कानून और स्थानीय भावना से जुड़ा है और इसे ‘प्रतिमा पॉलिटिक्स’ का विषय न बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति के विरोध में नहीं हैं। उनका कहना है कि अजीत जोगी और मुखर्जी दोनों की प्रतिमाएं लगनी चाहिए, लेकिन अपनी उपयुक्त और वैधानिक जगह पर।

आंदोलन की चेतावनी

अगर एक महीने के भीतर प्रतिमा को पुनर्स्थापित नहीं किया गया तो अमित जोगी ने आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो प्रतिमा रायपुर लाकर मुख्यमंत्री निवास के सामने रखी जाएगी और उनसे ही अनावरण कराया जाएगा।

अपराधियों को माफी, किताब भेंट

प्रेस वार्ता के अंत में अमित जोगी ने प्रतिमा हटाने वाले लोगों को व्यक्तिगत रूप से माफ करते हुए कहा कि वे उन्हें ‘जोगी को पढ़ो’ किताब भेंट कर रहे हैं ताकि वे जान सकें कि जिस व्यक्ति की मूर्ति उन्होंने हटाई, वो किस संघर्ष का प्रतीक थे।

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