आंध्र प्रदेश में 57 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया, 25 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन प्रभावित; ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का पूर्वानुमान |
विशाखापत्तनम: आंध्र प्रदेश और यनम के तट से टकराने के बाद चक्रवात ‘अर्नब’ कमजोर होकर अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान से गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की सुबह यह तूफान नरसापुर से लगभग 20 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में तट पार कर गया। इसके गुरुवार तक अपनी अधिकांश तीव्रता खोने की संभावना जताई गई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के अनुसार, चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई है और मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के मुताबिक, करीब 57 हजार लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।
चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में व्यापक नुकसान हुआ है। पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं तथा कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। राज्य के उत्तर और मध्य हिस्सों में 25 लाख से अधिक बिजली कनेक्शनों की आपूर्ति बाधित हुई, जबकि विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर 38 और विजयवाड़ा में 17 उड़ानें रद्द की गईं। मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय दल भेजने का अनुरोध किया है। पत्र के अनुसार, लगभग 70,900 हेक्टेयर में धान की फसल और 10,450 हेक्टेयर में बागवानी फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि करीब 180 मकानों को नुकसान पहुंचा है। तेलंगाना सरकार ने भी पुनर्बहाली कार्यों में आंध्र प्रदेश को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
तूफान का असर अब ओडिशा सहित आसपास के राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक मिली जानकारी के अनुसार, दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश और तेज हवाओं से पेड़ तथा बिजली के खंभे उखड़ने, सड़कों पर पानी भरने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य ने व्यापक तैयारियों के चलते जनहानि रोकने का लक्ष्य हासिल किया है, हालांकि गजपति जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, ओडिशा के साथ छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में इन राज्यों में स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देने तथा जलभराव वाले रास्तों और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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