बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल सेवाओं के OTP संदेशों का प्रारूप एक जैसा करने पर विचार; असली मैसेज की पहचान होगी आसान, लेकिन साइबर ठगी रोकने के लिए सतर्कता भी जरूरी |
मुख्य सुर्खियां
- TRAI OTP मैसेज का प्रारूप एक समान करने के प्रस्ताव पर कर रहा है विचार।
- संदेश में OTP का उद्देश्य, कंपनी का नाम और वैधता की जानकारी शामिल हो सकती है।
- नए प्रारूप से असली और संदिग्ध संदेश पहचानने में मिल सकती है मदद।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल प्रारूप बदलने से साइबर ठगी पूरी तरह नहीं रुकेगी।
- प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
नई दिल्ली। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और खरीदारी के दौरान इस्तेमाल होने वाले वन टाइम पासवर्ड (OTP) के संदेशों में बदलाव हो सकता है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) बैंक, ई-कॉमर्स कंपनियों और अन्य डिजिटल सेवाओं की ओर से भेजे जाने वाले OTP मैसेज का प्रारूप एक जैसा करने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को संदेश की पहचान करने में मदद देना और OTP के जरिए होने वाली धोखाधड़ी का जोखिम कम करना है।
इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, TRAI ने दूरसंचार कंपनियों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। नियामक इस संबंध में परामर्श पत्र भी जारी कर सकता है। हालांकि, अभी प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
OTP मैसेज में क्या बदलाव हो सकते हैं?
फिलहाल अलग-अलग बैंक, ई-कॉमर्स वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने अनुसार OTP संदेश भेजते हैं। कुछ संदेशों में कंपनी और सेवा का नाम स्पष्ट होता है, जबकि कुछ में केवल कोड और सीमित जानकारी दिखाई देती है। इस अंतर के कारण उपयोगकर्ताओं को कभी-कभी वास्तविक और फर्जी संदेशों के बीच अंतर करने में परेशानी होती है। प्रस्तावित व्यवस्था में OTP मैसेज के लिए एक निर्धारित प्रारूप बनाया जा सकता है। इसमें तीन प्रमुख जानकारियां शामिल हो सकती हैं:
- OTP का उद्देश्य: कोड लॉगिन, भुगतान या किसी अन्य सत्यापन के लिए भेजा गया है।
- भेजने वाली कंपनी: बैंक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या संबंधित सेवा की पहचान।
- वैधता अवधि: OTP कितनी देर तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
यदि संदेश में ये जानकारियां स्पष्ट रूप से दी जाती हैं, तो उपयोगकर्ताओं को उसे समझने में आसानी हो सकती है। हालांकि, अंतिम नियम और संदेश का प्रारूप तय होने के बाद ही वास्तविक बदलाव स्पष्ट होंगे।
बढ़ रहे हैं साइबर धोखाधड़ी के मामले
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें 2021 में 2.62 लाख से बढ़कर 2025 में 24.02 लाख हो गईं। इन शिकायतों में दर्ज रकम भी 551 करोड़ रुपये से बढ़कर 22,495 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
ये आंकड़े वित्तीय साइबर अपराधों में बढ़ोतरी दर्शाते हैं। हालांकि, इन सभी मामलों को OTP से जुड़ी ठगी नहीं माना जा सकता, क्योंकि OTP के दुरुपयोग से संबंधित अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
साइबर अपराधी बैंक अधिकारी या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर लोगों से OTP मांग सकते हैं। कुछ मामलों में फर्जी वेबसाइट, संदेश और लिंक के जरिए भी उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाया जाता है। ऐसे में संदेश का प्रारूप एक जैसा करना जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है, लेकिन यह अकेले पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं है।
क्या नए नियम से पूरी तरह रुकेगी ठगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि OTP संदेशों का मानकीकरण उपयोगी हो सकता है, लेकिन इससे साइबर धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं है। TRAI के पूर्व प्रमुख सलाहकार सत्य एन. गुप्ता के अनुसार, OTP मैसेज का प्रारूप एक जैसा करने में कोई बुनियादी नुकसान नहीं है। हालांकि, तकनीकी व्यवस्था और OTP के स्वरूप को लेकर जरूरत से ज्यादा नियामकीय हस्तक्षेप से कंपनियों की लागत और संचालन संबंधी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
टेकआर्क के मुख्य विश्लेषक फैसल कावूसा के मुताबिक, एक समान प्रारूप विशेष रूप से नए डिजिटल उपयोगकर्ताओं के लिए मददगार हो सकता है। दूसरी ओर, जालसाज भी वास्तविक संदेशों की नकल कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ कंपनियां SMS के बजाय WhatsApp के माध्यम से भी OTP भेजती हैं, जिससे अलग-अलग माध्यमों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
OTP की सुरक्षा के लिए पहले से मौजूद हैं उपाय
व्यावसायिक SMS के लिए दूरसंचार क्षेत्र में पंजीकरण और निर्धारित संदेश प्रारूप से संबंधित व्यवस्थाएं पहले से लागू हैं। संबंधित कंपनियों को अपने व्यावसायिक संदेशों के प्रारूप पंजीकृत कराने होते हैं और दूरसंचार ऑपरेटर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संदेशों की जांच करते हैं।
दूरसंचार विभाग ने फर्जी मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए भी तकनीकी उपाय अपनाए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चेहरे की पहचान पर आधारित एएसटीआर प्रणाली की मदद से 82 लाख से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं। वहीं, वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक प्रणाली ने 15 महीनों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित नुकसान को रोकने में मदद की है।
OTP इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
नया प्रस्ताव लागू हो या नहीं, डिजिटल लेनदेन करते समय सावधानी जरूरी है।
- अपना OTP किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- बैंक या केवाईसी अपडेट के नाम पर आए संदिग्ध लिंक न खोलें।
- अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल न करें।
- यदि आपने कोई लेनदेन शुरू नहीं किया है और OTP आता है, तो उसे किसी के साथ साझा न करें।
- खाते में अनधिकृत लेनदेन होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष: OTP मैसेज का प्रारूप एक समान करने से संदेशों की पहचान आसान हो सकती है और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है। लेकिन प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। उपयोगकर्ताओं को किसी भी परिस्थिति में OTP साझा करने से बचना चाहिए और संदिग्ध संदेशों से सतर्क रहना चाहिए।
खबरें और भी…ग्रुप से जुड़ें;https://chat.whatsapp.com/BbNFAy9gDg1E4s1kHkjJrG फेसबुक से जुड़ें;https://www.facebook.com/profile.php?id=61581539725954 यूट्यूब से जुड़ें; https://www.youtube.com/@swatantrachhattisgarh व्हात्सप्प चैनल से जुड़ें; https://whatsapp.com/channel/0029VaSGTZ1Lo4hYCjY45G2q ट्वीटर से जुड़ें; https://x.com/c35509


