Homeधर्मनवरात्रि का तीसरा दिन आज मां चंद्रघंटा की आराधना, जानें पूजा का...

Date:

नवरात्रि का तीसरा दिन आज मां चंद्रघंटा की आराधना, जानें पूजा का महत्व और देवी के स्वरूप से मिलने वाली सीख…

मां चंद्रघंटा की उपासना से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संदेश; अन्याय व बुराइयों का सामना करने की प्रेरणा देता है देवी का दिव्य स्वरूप |

हेडलाइंस
  • शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना का विधान।
  • देवी का स्वरूप साहस, शांति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।
  • श्रद्धालु पूजा-पाठ और मंत्र जाप के साथ कर रहे हैं मां दुर्गा की आराधना।

रायपुर। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का यह स्वरूप साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक माना जाता है। मां के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां की आराधना कर जीवन में सुख-समृद्धि, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप देता है साहस का संदेश

मां चंद्रघंटा को शस्त्र धारण करने वाली और दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में शांति बनाए रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी अन्याय और बुराइयों के सामने दृढ़ता से खड़े होना भी है। देवी की उपासना से जुड़ी मान्यताएं भक्तों को भय पर विजय पाने, आत्मविश्वास बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य से काम लेने की प्रेरणा देती हैं।

कैसे करें मां चंद्रघंटा की पूजा?

नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उनकी आराधना की जाती है। देवी को पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप और दुर्गा स्तुति करते हैं। मां चंद्रघंटा का प्रचलित मंत्र है— “ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः।” पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और मन की एकाग्रता का विशेष महत्व माना जाता है।

देवी का स्वरूप सिखाता है बुराइयों का सामना करना

मां चंद्रघंटा की उपासना का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। उनका स्वरूप व्यक्ति को अन्याय, भय, नकारात्मकता और गलत कार्यों के विरुद्ध आवाज उठाने की प्रेरणा देता है। जीवन में चुनौतियां आने पर घबराने के बजाय विवेक, संयम और साहस से उनका सामना करना चाहिए। समाज में महिलाओं के सम्मान, कमजोर लोगों की सहायता और सत्य के पक्ष में खड़े होने जैसे मूल्यों को अपनाना भी देवी के आदर्शों से जुड़ा संदेश माना जा सकता है।

मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवी पार्वती का विवाह भगवान शिव से हुआ, तब उन्होंने अपने दिव्य और अलौकिक स्वरूप को धारण किया। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान था। इसी कारण वे मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और वीरतापूर्ण है। उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं और वे सिंह पर सवार रहती हैं। उनका यह रूप भक्तों को निर्भय रहने तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

कथा के अनुसार, जब दुष्ट शक्तियों ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू किया, तब माता ने अपने दिव्य स्वरूप से उनका सामना किया। उनके घंटे की ध्वनि से दुष्ट शक्तियां भयभीत हो उठीं। माता ने युद्धभूमि में अपने पराक्रम से अधर्म का मुकाबला किया और देवताओं की रक्षा की। इस प्रकार मां चंद्रघंटा शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा की प्रतीक मानी जाती हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलने की मान्यता है। माता का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में शांति बनाए रखते हुए अन्याय के विरुद्ध खड़े होना चाहिए।

  • प्रिय रंग: सुनहरा और पीला रंग शुभ माना जाता है।
  • प्रिय भोग: दूध से बनी मिठाइयां और खीर अर्पित करने की परंपरा है।
  • पूजा मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
  • विशेष संदेश: साहस, संयम और धर्म के मार्ग पर चलना।

मां चंद्रघंटा की आरती और प्रार्थना

हे मां चंद्रघंटा, आप अपने भक्तों के जीवन से भय और संकट दूर करें। सभी को साहस, सद्बुद्धि और सुख-समृद्धि प्रदान करें। आपके आशीर्वाद से घर-परिवार में शांति, प्रेम और सकारात्मकता बनी रहे। जय माता दी! जय मां चंद्रघंटा

नवरात्रि का यह दिन भक्तों को शक्ति और शांति के बीच संतुलन बनाए रखने की सीख देता है। मां चंद्रघंटा की आराधना के साथ श्रद्धालु अपने जीवन में सद्भाव, आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों को अपनाने का संकल्प ले सकते हैं।

स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वतंत्र छत्तीसगढ़https://swatantrachhattisgarh.com
(संपादक) इस साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी । स्वतंत्र छत्तीसगढ़ इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। स्वतंत्र छत्तीसगढ़ में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वतंत्र छत्तीसगढ़ या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्याय क्षेत्र रायपुर होगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related