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Friday, April 10, 2026

तात्यापारा-शारदा चौक चौड़ीकरण पर सियासत तेज: फ्लाईओवर के विरोध में उतरे विधायक, 19 साल पुरानी मांग फिर बनी मुद्दा…

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स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क

हाइलाइट :

  • फ्लाईओवर निर्माण का दोनों विधायकों ने किया विरोध
  • तात्यापारा और शारदा चौक चौड़ीकरण को बताया प्राथमिक जरूरत
  • पुरंदर मिश्रा बोले—फ्लाईओवर का कोई औचित्य नहीं
  • सुनील सोनी ने कहा—सड़क चौड़ीकरण ही असली समाधान
  • कांग्रेस ने भी किया समर्थन, 19 साल से जारी है मांग

फ्लाईओवर बनाम जमीनी जरूरत: मुद्दे ने पकड़ा जोर
शहर में प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण को लेकर अब राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। भाजपा के दोनों विधायक खुलकर इसके विरोध में सामने आ गए हैं और उन्होंने साफ कहा है कि शहर की वर्तमान जरूरत फ्लाईओवर नहीं, बल्कि तात्यापारा और शारदा चौक का चौड़ीकरण है। उनका मानना है कि बिना मूल समस्या को सुलझाए बड़े प्रोजेक्ट लाने से जनता को राहत नहीं मिलेगी। यह मुद्दा अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां हर पक्ष अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर रहा है।

पुरंदर मिश्रा का बयान: “फ्लाईओवर का कोई औचित्य नहीं”
विधायक पुरंदर मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान स्थिति में फ्लाईओवर का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस स्थान पर फ्लाईओवर प्रस्तावित है, वहां की जमीनी हकीकत को समझे बिना योजना बनाई गई है। “लोगों को रोजाना जिन सड़कों पर जाम का सामना करना पड़ता है, पहले उन्हें ठीक करना जरूरी है,” उन्होंने कहा। मिश्रा के अनुसार तात्यापारा और शारदा चौक शहर के सबसे अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं, जहां सड़कें संकरी हैं और यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि पहले इन मार्गों का चौड़ीकरण किया जाए, तो तत्काल राहत मिल सकती है।

▶️ सुनील सोनी का समर्थन: “सड़क चौड़ीकरण ही समाधान”
वहीं विधायक सुनील सोनी ने भी इसी मुद्दे पर अपनी सहमति जताते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण ही ट्रैफिक समस्या का वास्तविक समाधान है। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर बन जाने से केवल एक हिस्से में राहत मिल सकती है, लेकिन शहर के भीतर के जाम की समस्या जस की तस बनी रहेगी। “हमें ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए जो सीधे जनता को राहत दें,” सोनी ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चौड़ीकरण से न केवल ट्रैफिक सुगम होगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

कांग्रेस का रुख: 19 साल पुरानी मांग को मिला समर्थन
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी चौड़ीकरण की मांग का समर्थन करते हुए इसे जनता की लंबे समय से चली आ रही जरूरत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तात्यापारा और शारदा चौक के चौड़ीकरण की मांग पिछले 19 वर्षों से उठती रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा कर मूल समस्याओं से ध्यान भटकाती रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते चौड़ीकरण कर दिया जाता, तो आज शहर को इस स्तर के ट्रैफिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता।

जनता की आवाज: “पहले जाम से राहत चाहिए”
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने भी इस बहस में अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्हें फ्लाईओवर से ज्यादा जरूरत रोजमर्रा के ट्रैफिक जाम से राहत की है। तात्यापारा और शारदा चौक जैसे क्षेत्रों में सुबह से लेकर शाम तक लंबा जाम लगा रहता है, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी बाधा पहुंचती है। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “फ्लाईओवर बनने में सालों लगेंगे, लेकिन अगर सड़क चौड़ी हो जाए तो तुरंत फर्क दिखेगा।”

विकास की प्राथमिकताओं पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद ने शहर में विकास योजनाओं की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से पहले जमीनी स्तर की समस्याओं को हल करना जरूरी होता है। यदि स्थानीय यातायात व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, तो बड़े प्रोजेक्ट भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाते। ऐसे में प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि वह किस योजना को प्राथमिकता देता है—तत्काल राहत देने वाला चौड़ीकरण या दीर्घकालिक दृष्टिकोण वाला फ्लाईओवर।

आगे क्या? प्रशासनिक निर्णय पर टिकी नजरें
अब इस पूरे मामले में सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। क्या सरकार विधायकों और जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना में बदलाव करेगी, या फिर फ्लाईओवर परियोजना को ही आगे बढ़ाएगी—यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि तात्यापारा और शारदा चौक का मुद्दा अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि शहर के विकास की दिशा तय करने वाला बड़ा विषय बन चुका है।

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