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Tuesday, May 26, 2026

झीरम घाटी हत्याकांड पर फिर गरमाई सियासत, रमन–भूपेश आमने-सामने…

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हाईलाइट बॉक्स:

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की चर्चाओं के बीच झीरम घाटी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल के बीच तीखी बयानबाज़ी ने इस संवेदनशील मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है।

रमन सिंह का तंज: “जेब में सबूत या सिर्फ कतरन?”

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने झीरम घाटी नक्सल हमले को लेकर भूपेश बघेल पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अक्सर यह दावा किया जाता था कि बघेल के पास इस मामले के अहम सबूत हैं, लेकिन जब भी वे उन्हें सामने लाने की बात करते हैं, तो केवल अखबार की कतरन ही निकलती है। रमन सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पांच साल के कार्यकाल में केवल आरोप-प्रत्यारोप ही किए गए, ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।

भूपेश बघेल का पलटवार: “जांच होने ही नहीं दी”

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी जांच से परहेज नहीं किया, बल्कि विपक्ष की ओर से ही जांच को बाधित किया गया। बघेल ने आरोप लगाया कि कोर्ट का सहारा लेकर बार-बार जांच प्रक्रिया को रोका गया, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ सकी।

ट्वीट वार से बढ़ा राजनीतिक तापमान

दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग सोशल मीडिया पर भी खुलकर सामने आई। रमन सिंह के ट्वीट के बाद भूपेश बघेल ने सीधे जवाब देते हुए कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हो, तो सभी सबूत पेश किए जा सकते हैं। उनके इस बयान ने सियासी हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है और समर्थकों के बीच भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

झीरम घाटी कांड: संवेदनशीलता और राजनीति

झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक रहा है, जिसमें कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की जान गई थी। इस घटना को लेकर वर्षों से जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं। ऐसे में जब भी यह मुद्दा उठता है, तो प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो जाती है और पीड़ित परिवारों की उम्मीदें भी फिर जाग उठती हैं।

आगे क्या? जांच और सियासत का संतुलन

वर्तमान बयानबाज़ी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में कभी निष्पक्ष और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकेगा। जनता और पीड़ित परिवार अब भी सच्चाई के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। राजनीतिक आरोपों के बीच यह भी जरूरी है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद बने, ताकि न्याय की उम्मीद पूरी हो सके।

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