रायपुर / छत्तीसगढ़
रायपुर के नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के विरोध में मसीही समाज के सैकड़ों लोग एकत्र हुए और राजभवन की ओर कूच करने लगे। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोक लिया, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भीड़ का आक्रोश साफ नजर आया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह विधेयक उनके धार्मिक अधिकारों और स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
विधेयक क्या कहता है और क्यों हो रहा विरोध
छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के तहत लालच, प्रलोभन या दबाव देकर धर्मांतरण को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है। वहीं मसीही समाज का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इससे धार्मिक गतिविधियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा। उनका कहना है कि “लालच” की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे आम धार्मिक कार्य भी विवादों में आ सकते हैं।
कांग्रेस vs बीजेपी—राजनीतिक बयानबाज़ी तेज
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरते हुए इसे राजनीतिक एजेंडा बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह विधेयक समाज को बांटने का काम करेगा। वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध नहीं, बल्कि केवल प्रलोभन देकर होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। भाजपा का तर्क है कि यह कानून सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
मसीही समाज की मुख्य चिंताएं क्या हैं
मसीही समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कानून से उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों पर निगरानी बढ़ेगी। वे आशंकित हैं कि किसी भी प्रकार की सेवा या सहायता गतिविधि को “लालच” मान लिया जाएगा, जिससे अनावश्यक कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यही कारण है कि वे इस विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
क्या आगे और बढ़ेगा विवाद?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक तनाव आगे और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़े प्रदर्शन या राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकते हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है और क्या इस विधेयक में कोई संशोधन या स्पष्टीकरण लाया जाता है।
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