तेहरान /देश-विदेश
मुख्य बिंदु
- अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद संघर्ष चौथे दिन में प्रवेश
- ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद हालात और गंभीर
- अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल पर ईरान की जवाबी कार्रवाई तेज
- रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाए जाने की खबर
- तेल बाजार, हवाई सेवाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर
क्षेत्रीय तनाव से वैश्विक चिंता तक
तेहरान में शुरू हुआ सैन्य टकराव अब पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले चुका है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले का मंगलवार को चौथा दिन है और हालात लगातार बिगड़ते दिख रहे हैं। क्षेत्र में हवाई यातायात बाधित हुआ है, कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रूट बदलना पड़ा है और बीमा प्रीमियम में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से एशियाई और यूरोपीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका प्रभाव भारत सहित ऊर्जा आयातक देशों पर सीधा पड़ रहा है।
नेतृत्व संकट के बाद तेज हुई जवाबी कार्रवाई
ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामनेई की मौत की खबर के बाद तेहरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच टकराव ने खुला सैन्य रूप ले लिया है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं और इजराइल के प्रमुख शहरों की ओर भी ताबड़तोड़ रॉकेट दागे गए हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार दोनों पक्षों को जानमाल का नुकसान हुआ है, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष यदि लंबा खिंचता है तो क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला, अनिश्चितता बरकरार
इस बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाए जाने की खबर ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हमले के बाद परिसर में आग लगने की सूचना है, हालांकि हताहतों की संख्या को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्रीय कूटनीतिक हलकों में इसे संघर्ष के संभावित विस्तार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक समुदाय ने संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है, क्योंकि इस टकराव का असर केवल सीमित भूभाग तक नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा ढांचे पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
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