मैनपाट में पीलिया का कहर: पूर्व उप सरपंच और छात्र समेत चार की मौत, दर्जनों बीमार…

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अंबिकापुर / छत्तीसगढ़

सरगुजा के कई गांवों में फैला संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर; पानी के नमूनों की जांच शुरू

हेडलाइंस:

  • मैनपाट क्षेत्र में पीलिया का गंभीर प्रकोप
  • पूर्व उप सरपंच और नौवीं कक्षा के छात्र सहित चार लोगों की मौत
  • दर्जनों ग्रामीण बीमार, कई मरीज अंबिकापुर और रायपुर में भर्ती
  • स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची
  • बीमारी के कारणों की जांच के लिए पानी के नमूने लिए गए

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में पीलिया (जॉन्डिस) के बढ़ते प्रकोप ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र के कई गांवों में बीमारी तेजी से फैल रही है, जिससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल है। अब तक पूर्व उप सरपंच और एक छात्र सहित चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग बीमारी की चपेट में हैं। कई गंभीर मरीजों का इलाज अंबिकापुर और रायपुर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

कई गांवों में फैला संक्रमण, लगातार बढ़ रहे मरीज

जानकारी के अनुसार मैनपाट विकासखंड के नर्मदापुर, कुनिया, बईगहवा, बरिमा तथा आसपास के गांवों में पीलिया के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। बीमारी के कारण कुनिया गांव के पूर्व उप सरपंच जितेंद्र यादव, नर्मदापुर निवासी भाग्यवती यादव, बईगहवा की एक युवती तथा बरिमा गांव के कक्षा नौवीं के छात्र विकास यादव की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

बुखार, कमजोरी और उल्टी के लक्षणों से परेशान ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में लोग बुखार, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी और पीलिया जैसे लक्षणों से पीड़ित हैं। कई मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए अंबिकापुर और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमारी तेजी से फैल रही है, जिससे गांवों में चिंता और भय का वातावरण बना हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में डटी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य दल भेजे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने पीलिया के मामलों की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य परीक्षण, सर्वेक्षण और उपचार कार्य में जुटी हुई हैं। साथ ही लोगों को स्वच्छ पानी पीने, साफ-सफाई बनाए रखने और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

पानी के नमूनों की जांच से खुलेगा बीमारी का राज

अधिकारियों ने बताया कि बीमारी के स्रोत और कारणों का पता लगाने के लिए प्रभावित गांवों से पानी के नमूने एकत्र किए गए हैं। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद संक्रमण के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। प्राथमिक तौर पर दूषित पेयजल को संक्रमण फैलने की एक संभावित वजह माना जा रहा है।

ग्रामीणों ने की सुरक्षित पेयजल और चिकित्सा सुविधा बढ़ाने की मांग

लगातार बढ़ते मामलों और मौतों के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में अतिरिक्त स्वास्थ्य शिविर लगाने, पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था तत्काल करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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