सूरजपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स:
• 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के बंदियों पर विशेष फोकस
• योग, काउंसलिंग और कौशल विकास के जरिए सकारात्मक बदलाव पर जोर
• रिहाई के बाद आत्मनिर्भर और कानून पालन करने वाला नागरिक बनाने की पहल
पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम
सूरजपुर। जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं छत्तीसगढ़ द्वारा शुरू किए गए ‘निश्चय’ कार्यक्रम के तहत जिला जेल सूरजपुर में युवा बंदियों के पुनर्वास की महत्वपूर्ण पहल की गई। गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन एवं डीआईजी/एसएसपी श्री प्रशांत कुमार ठाकुर की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के विचाराधीन बंदियों को पुनः अपराध की ओर न लौटने और सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा बंदियों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रयास है।
“जेल को सजा नहीं, सुधार का केंद्र बनाएं”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जेल की चारदीवारी को केवल दंड स्थल न मानकर, उसे सुधार गृह के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बंदियों को अच्छे कार्य सीखने, गलत आदतों से दूरी बनाने और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी। योग, ध्यान और काउंसलिंग सत्रों का भरपूर उपयोग करने पर भी बल दिया गया, ताकि मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास को मजबूत किया जा सके। उनका कहना था कि जेल से बाहर निकलना एक नई शुरुआत का अवसर है, जिसे सार्थक दिशा दी जानी चाहिए।
शिक्षा, कौशल और संस्कार पर फोकस
डीआईजी/एसएसपी श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने कहा कि ‘निश्चय’ कार्यक्रम का मूल उद्देश्य युवा बंदियों को मुख्यधारा में वापस लाना है। इसके लिए शिक्षा, कौशल विकास, संस्कार और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बंदियों से अपील की कि अतीत की गलतियों को पीछे छोड़कर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें और समाज में अपराध से दूर रहने का संदेश दें। जिला जेल अधीक्षक अक्षय तिवारी ने बताया कि पुलिस महानिदेशक जेल छत्तीसगढ़ श्री हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में योग, आर्ट ऑफ लिविंग, कानूनी जागरूकता तथा आगामी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि रिहाई के बाद बंदी आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम में जेल स्टाफ एवं विचाराधीन बंदी उपस्थित रहे।
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