देश-विदेश /वाशिंगटन
मुख्य बिंदु
▪ 6-3 के बहुमत से फैसला, राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं
▪ भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अमान्य
▪ चीन पर 34% और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ खत्म
▪ 200 अरब डॉलर वसूली के रिफंड पर बड़ा सवाल
संवैधानिक अधिकार पर ऐतिहासिक फैसला
Supreme Court of the United States ने शुक्रवार को राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। 6-3 के बहुमत से दिए गए इस ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स और आयात शुल्क लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। इस निर्णय के साथ भारत पर लगाया गया 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अवैध घोषित हो गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध जैसी स्थिति में नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर व्यापक टैरिफ लागू करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
किन टैरिफ पर लगी रोक, क्या रहेगा लागू
अप्रैल 2025 में ट्रम्प प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति का हवाला देते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी आयात शुल्क लगाया था। चीन पर 34% और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ तय किया गया था। इसके अलावा कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था, जिसे फेंटेनाइल तस्करी रोकने से जोड़ा गया था। कोर्ट के फैसले के बाद ये दोनों प्रमुख श्रेणियां निरस्त हो गई हैं। हालांकि स्टील और एल्युमिनियम पर अलग कानूनों के तहत लगाए गए टैरिफ फिलहाल प्रभावी रहेंगे। फैसले से असहमति जताने वाले जजों—Samuel Alito, Clarence Thomas और Brett Kavanaugh—ने कहा कि टैरिफ नीति की समझदारी अलग विषय हो सकता है, लेकिन उनके अनुसार यह कानूनी रूप से वैध थी।
200 अरब डॉलर वसूली और रिफंड पर अनिश्चितता
The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की शुरुआत से ट्रम्प प्रशासन ने 200 अरब डॉलर से अधिक की टैरिफ वसूली की है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सरकार को कंपनियों को यह राशि लौटानी पड़ेगी। कई कंपनियों ने पहले ही अदालत में याचिकाएं दायर कर रिफंड का दावा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिफंड का आदेश आता है, तो यह अमेरिकी राजकोष पर भारी बोझ डाल सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर भी असर पड़ेगा। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।
ख़बरें और भी..


