हाइलाइट :
• मुंबई क्राइम ब्रांच की फर्जी जांच का डर दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’
• WhatsApp पर फर्जी FIR भेजकर गिरफ्तारी की धमकी
• 15 दिनों में अलग-अलग खातों में 1.28 करोड़ रुपये ट्रांसफर
• पीड़ित बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
फर्जी जांच और डिजिटल अरेस्ट का डर:
रायपुर : विधानसभा रोड स्थित स्वर्णभूमि कॉलोनी निवासी 74 वर्षीय रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर स्वप्न सेन को साइबर ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर निशाना बनाया। ठगों ने कॉल के जरिए कथित जांच का हवाला देते हुए उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में होने की बात कही और किसी को भी जानकारी देने पर तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी। दबाव बनाने के लिए WhatsApp पर एक फर्जी एफआईआर की कॉपी भेजी गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके खातों में बड़ी रकम का संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
15 दिनों में 1.28 करोड़ की वसूली:
भय और मानसिक दबाव में आए डॉक्टर सेन को फर्जी पुलिस अफसर बनकर किए गए लगातार कॉल्स के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने को कहा गया। जांच और सत्यापन का बहाना बनाकर ठगों ने 15 दिनों के भीतर उनसे कुल 1.28 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में डलवा लिए। परिजनों के अनुसार, ठग बार-बार यह कहते रहे कि मामला अत्यंत गोपनीय है और किसी से भी चर्चा करने पर स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
पुलिस कार्रवाई और स्वास्थ्य पर असर:
घटना की जानकारी मिलने पर विधानसभा पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर जांच हेतु जोन साइबर थाने को भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है और न ही फोन या मैसेज के जरिए पैसे मांगे जाते हैं। लगातार तनाव और सदमे के कारण पीड़ित बुजुर्ग की हालत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि इस तरह के कॉल या संदेश मिलने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
ख़बरें और भी…


