करीब 25 एकड़ में विकसित हो रही जनजातीय गौरव वाटिका, लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत। यह वाटिका पर्यटन, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संयुक्त मॉडल बनेगी। पूरी तरह प्लास्टिक फ्री परिसर में स्थानीय जैव-विविधता और ऑर्किड संरक्षण पर विशेष जोर।
जगदलपुर को प्रदूषण से दूर प्रकृति की गोद में सुकून देने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में जनजातीय गौरव वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने निर्माणाधीन वाटिका का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह परियोजना न केवल शहर के लिए एक नया पर्यटन केंद्र बनेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरक पहल के रूप में सामने आएगी।

स्वास्थ्य, योग और सामाजिक जुड़ाव की सुविधाएं
करीब 25 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत भले ही हेल्थ पार्क के रूप में हुई हो, लेकिन अब इसे एक बहुआयामी वाटिका का रूप दिया गया है। यहां स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए लगभग 1700 मीटर लंबा वॉकिंग ट्रेल बनाया गया है। इसके साथ योगा शेड, योगा जोन और ओपन जिम जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में गपशप जोन, बैठने के प्लेटफॉर्म और कुर्सियां लगाई गई हैं, ताकि लोग आराम के साथ सामाजिक संवाद भी कर सकें। पारिवारिक आयोजनों और छोटी पार्टियों के लिए पांच आकर्षक पगोड़ा भी बनाए गए हैं, जिन्हें बुक किया जा सकेगा।
इको-फ्रेंडली मॉडल और जैव-विविधता संरक्षण
वाटिका को पूरी तरह इको-फ्रेंडली और प्लास्टिक फ्री बनाया जा रहा है। पर्यटकों को बाहर से किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। खान-पान की व्यवस्था परिसर के भीतर स्थित कैंटीन से होगी, जहां केवल बायो-डिग्रेडेबल दोने और पत्तल में भोजन परोसा जाएगा। कैंटीन का संचालन स्थानीय महिला समूहों या समितियों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे उन्हें आजीविका के अवसर भी मिलेंगे। इसके साथ ही यह वाटिका जैव-विविधता संरक्षण का केंद्र बनेगी, जहां कांगेर घाटी और बस्तर के अन्य वन क्षेत्रों से विलुप्त हो रही दुर्लभ पौध प्रजातियों और सुंदर ऑर्किड को संरक्षित किया जा रहा है। बच्चों के लिए अलग प्ले एरिया और जंगलनुमा डाइनिंग क्षेत्र इस वाटिका को हर आयु वर्ग के लिए खास बनाएंगे।
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