नया बस स्टैंड के पीछे वन भूमि पर बने 100 से अधिक मकानों पर जिला प्रशासन की कार्रवाई से बीजापुर में आक्रोश। प्रभावित परिवारों ने विधायक विक्रम मंडावी के नेतृत्व में किया नेशनल हाईवे जाम, बिना नोटिस कार्रवाई का लगाया आरोप।

प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
बीजापुर: जिले में एक ओर सरकार सुशासन के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गरीब और असहाय परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर जनाक्रोश सामने आया है। जिला मुख्यालय स्थित नया बस स्टैंड के पीछे वन भूमि पर बने 100 से अधिक मकानों को जिला प्रशासन ने जेसीबी मशीन से तोड़ दिया। इस कार्रवाई में नक्सल पीड़ित परिवारों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस की डीआरजी इकाई से जुड़े कुछ कर्मियों के आवास भी शामिल बताए जा रहे हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से दर्जनों परिवार बेघर हो गए, जिससे इलाके में नाराजगी फैल गई।
बिना नोटिस तोड़फोड़ का आरोप
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि नगर पालिका या वन विभाग की ओर से उन्हें किसी प्रकार का पूर्व नोटिस नहीं दिया गया। लोगों का कहना है कि वे पिछले तीन से चार वर्षों से यहां निवास कर रहे थे, इसके बावजूद अचानक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। नागरिकों का सवाल है कि इतने लंबे समय तक प्रशासन चुप क्यों रहा और अब अचानक यह कदम क्यों उठाया गया। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा का प्रयास किया, लेकिन समय पर अधिकारियों के नहीं पहुंचने से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
बातचीत के बाद हटाया गया जाम
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में प्रभावित परिवारों और स्थानीय नागरिकों ने विधायक विक्रम मंडावी के नेतृत्व में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। काफी देर बाद नगर पालिका के अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों द्वारा समस्या पर चर्चा और समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद जाम समाप्त कराया गया। फिलहाल प्रशासन और प्रभावित नागरिकों के बीच संवाद जारी है, लेकिन यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता, पुनर्वास व्यवस्था और मानवीय दृष्टिकोण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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