हाइलाइट :
कांकेर जिले के छह गांवों के 50 से अधिक परिवारों के लगभग 200 लोगों ने आपसी संवाद और सामाजिक सहमति के बाद सनातन धर्म में वापसी की। पीढ़ापाल गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों की उपस्थिति रही, जबकि प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।

सामाजिक संवाद के बाद लिया गया सामूहिक निर्णय:
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रविवार को एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुल गांवों के धर्मांतरित परिवारों ने अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय किया। जानकारी के अनुसार, 50 से अधिक परिवारों के करीब 200 लोगों ने आपसी सहमति और सामाजिक संवाद के बाद यह फैसला लिया। पीढ़ापाल गांव में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रमुख, गायता, पटेल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ स्वागत:
घर वापसी कार्यक्रम के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना की गई और गंगाजल छिड़काव के साथ विधिवत रूप से लोगों को उनके मूल धर्म में शामिल किया गया। समाज की ओर से पारंपरिक तरीकों से स्वागत किया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल शांतिपूर्ण और भावनात्मक रहा। एक साथ 200 लोगों की वापसी की खबर ने आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बना लिया है।
आदिवासी समाज में खुशी, प्रशासन की निगरानी:
सर्व आदिवासी समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने बताया कि ग्राम पीढ़ापाल में 25 गांवों के समाज प्रमुखों की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के कुछ परिवार अभी शेष हैं, जो भविष्य में इसी तरह सामाजिक सहमति से निर्णय ले सकते हैं। घर वापसी करने वाले कुछ लोगों ने बताया कि पूर्व में उन्हें बीमारी ठीक होने जैसे वादों और अन्य प्रलोभनों के चलते धर्म परिवर्तन कराया गया था, लेकिन लंबे समय बाद उन्होंने अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से निगरानी रखी गई और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। आदिवासी समाज में इस फैसले को लेकर संतोष और खुशी का माहौल देखा गया।
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