रायपुर/ छत्तीसगढ़
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े 15 वर्ष पुराने एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला आया है। न्यायालय ने कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल सहित छह नेताओं को सभी आरोपों से दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पूरे 15 वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और केवल एक ही गवाह अदालत में पेश किया जा सका। विपक्षी नेताओं ने इस फैसले को “सत्य और न्याय की जीत” बताया है।
यह मामला वर्ष 2010 का है, जब तत्कालीन भाजपा शासनकाल के दौरान मौदहापारा स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज परिसर में 108 एंबुलेंस सेवा के निजीकरण के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान मौदहापारा पुलिस ने अपराध क्रमांक 272/2010 दर्ज करते हुए नेताओं पर धारा 147, 148, 149, 427, 452 और 323 भादवि के तहत गंभीर आरोप लगाए थे। मामला न्यायिक दंडाधिकारी सावित्री रक्सेल की अदालत में विचाराधीन रहा। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके चलते सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।
अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल ने कहा कि यह भारतीय न्यायपालिका और न्यायिक प्रक्रिया की जीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया था, लेकिन अंततः सच सामने आ गया। उन्होंने कहा — “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भगवानू नायक ने भी दलील दी कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित था, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए आरोप निराधार पाए।
इस फैसले के बाद सत्ता के कथित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि वह संविधान और कानून के शासन में आस्था रखती है और यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को और मजबूत करता है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय न्यायिक व्यवस्था की मजबूती और निष्पक्षता का प्रमाण है।
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