
इंडिगो की उड़ाने केंसिल होने के बाद एयरपोर्ट पर लगी यात्रियों की भीड़
इंडिगो की उड़ानों में सुधार और यात्रियों को बड़ा रिफंड
पिछले कुछ दिनों से इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों में तकनीकी समस्याओं और स्टाफ की कमी के कारण बड़ी संख्या में फ्लाइटें रद्द या देरी से चल रही थीं, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इंडिगो ने रिफंड प्रक्रिया तेज की और सरकारी आदेश के तहत 7 दिसंबर रात 8 बजे तक सभी प्रभावित यात्रियों को टिकट राशि लौटाने का काम पूरा किया। कुल मिलाकर लगभग 610 करोड़ रुपये यात्रियों को वापस किए जा चुके हैं। साथ ही मंत्रालय ने एयरलाइन को साफ निर्देश दिया था कि किसी भी प्रभावित यात्री से री-शेड्यूलिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे यात्रियों को राहत महसूस हुई। मंत्रालय का कहना है कि शनिवार तक 1,565 उड़ानें संचालित हो चुकी थीं और रविवार को इस संख्या के बढ़कर 1,650 तक पहुंचने की उम्मीद है, जो संकेत देता है कि इंडिगो के ऑपरेशन धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
बैगेज डिलीवरी और इंडिगो पर मंत्रालय की सख्त कार्रवाई
फ्लाइट रद्द या देर होने के चलते सैकड़ों यात्रियों का सामान विभिन्न एयरपोर्ट्स पर छूट गया था या गलत स्थान पर पहुंच गया था। मंत्रालय ने इंडिगो को स्पष्ट आदेश दिया कि प्रत्येक बैग को 48 घंटे के भीतर उसके सही पते पर पहुंचाया जाए। इसके बाद एयरलाइन ने तेज़ी से काम करते हुए अब तक 3,000 से ज्यादा बैगेज यात्रियों को वापस कर दिए हैं। एक यात्री ने बताया कि उनका बैग 36 घंटे बाद घर पहुंचा—“कम से कम रिफंड और बैग मिल जाने से थोड़ी राहत है, वरना स्थिति बहुत खराब थी,” उन्होंने कहा। वहीं, कई हवाई अड्डों के अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह की तुलना में बैगेज क्लेम की भीड़ अब काफी कम हो चुकी है, जिससे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
आगे की रणनीति पर मंत्रालय की नई बैठक
इंडिगो की उड़ानों का संचालन भले ही अब पटरी पर लौटता दिख रहा हो, लेकिन मंत्रालय इस पूरे संकट को लेकर और भी कड़े कदम उठाने के मूड में है। सूत्रों के अनुसार नागरिक उड्डयन मंत्रालय सभी एयरलाइन ऑपरेटरों के साथ एक और उच्च-स्तरीय बैठक करेगा, जिसमें फ्लाइट रद्दीकरण, स्टाफ मैनेजमेंट, टेक्निकल ऑडिट और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के मुद्दों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि मंत्रालय एयरलाइंस से आपात स्थिति में वैकल्पिक योजना (contingency plan) को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी कर सकता है। यदि ऐसे निर्देश लागू होते हैं, तो इससे भविष्य में यात्रियों को होने वाली परेशानियों में काफी कमी आ सकती है और एयरलाइंस को ऑपरेशन प्रबंधन में अधिक जवाबदेही निभानी होगी।
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