रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत पंजीयन नहीं कराने वाले बिजली कर्मचारियों को इस महीने बड़ा झटका लगा है। पावर कंपनी ने ऐसे कर्मचारियों की बिल रियायत बंद कर दी है और नवंबर माह की खपत का पूरा बिजली बिल जारी किया है। इसके बाद कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कर्मचारी संगठनों ने प्रबंधन के इस निर्णय को गैर-व्यवहारिक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब पावर कंपनी ने घरेलू उपभोक्ताओं और विशेष रूप से अपने अधिकारियों–कर्मचारियों को रूफटॉप सोलर लगाने के लिए प्रेरित करने अभियान चलाया। इसके तहत 25 नवंबर तक पीएम सूर्य घर योजना में पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया था। कंपनी का प्रयास था कि कर्मचारी खुद इस पहल का हिस्सा बनें और सौर ऊर्जा को अपनाकर बिजली बचत के संदेश को मजबूत करें। लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी लगभग आधे कर्मचारियों ने पंजीयन नहीं कराया।
इसे गंभीरता से लेते हुए प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाया और पंजीयन नहीं कराने वाले कर्मचारियों की सभी बिल रियायतें तत्काल प्रभाव से बंद कर दीं। इस फैसले से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है और कर्मचारी संगठन इसे दबाव की गलत नीति बता रहे हैं। कई कर्मचारी इसे मनमानी कार्रवाई मानते हुए जल्द ही बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में जुट गए हैं।
इस बीच, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को लेकर प्रदेशभर में जागरूकता अभियान तेज़ है। यह योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत आम उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, भारी सब्सिडी और रूफटॉप सोलर लगाने पर विविध लाभ दिए जा रहे हैं। अधिकारी लगातार शिविर लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि सौर ऊर्जा अपनाने से न सिर्फ महंगे बिजली बिल से राहत मिलेगी, बल्कि बिजली कटौती की समस्या भी कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलेगा।
कुल मिलाकर, जहां एक ओर सूर्य घर योजना की रफ्तार तेज हो रही है, वहीं कर्मचारियों पर पड़ी यह रियायत कटौती की मार बिजली कंपनी और कर्मचारियों के बीच टकराव को जन्म दे रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में प्रबंधन और कर्मचारी संगठन इस विवाद का समाधान किस तरह निकालते हैं।
खबरें और भी…


