स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क
हाइलाइट
भारतीय संस्कृति , सेवा और शिक्षा के मूल्यों को बच्चों तक पहुँचाने की दिशा में ‘संस्कारम्’ समिति ने एक नई पहल की है । इस साप्ताहिक कार्यशाला में वेद , पुराण , गीता और महापुरुषों की शिक्षाओं से बच्चों को जोड़ा जाएगा ।
कोरबा । भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ‘संस्कारम्’ संस्कार , सेवा और शिक्षा समिति द्वारा आज श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर , दर्री रोड कोरबा में साप्ताहिक कार्यशाला का शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में धार्मिक , सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का विकास करना है , ताकि वे अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति को आत्मसात कर सकें ।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुसार पंडित दिलीप त्रिपाठी के मार्गदर्शन में मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई । पंडित त्रिपाठी ने बच्चों को भारतीय संस्कृति की महान परंपराओं से परिचित कराते हुए वेद , पुराण , गीता , रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा , “जब तक नई पीढ़ी अपने मूल संस्कारों और शास्त्रों से नहीं जुड़ेगी , तब तक संस्कृति का आधार कमजोर रहेगा ।”
उन्होंने बच्चों को महापुरुषों के जीवन प्रसंगों , नीति श्लोकों और राष्ट्रप्रेम की भावना से प्रेरित होने का संदेश दिया । कार्यशाला में बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और भारतीय परंपराओं के विभिन्न प्रसंगों पर अपने विचार साझा किए ।

समिति की संरक्षक एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती चित्रलेखा चंदेल के कुशल नेतृत्व में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । श्रीमती चंदेल पिछले 45 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में समाजसेवा और संस्कृति संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं । उन्होंने कहा , “संस्कारम् कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के मन में सेवा , संस्कृति और शिक्षा के प्रति प्रेम जगाना है , ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें ।”
कार्यक्रम के संचालन में समिति की सदस्याएं श्रीमती आकांक्षा चंदेल , नेहा अग्रवाल , स्वाति अग्रवाल , प्रियंका जायसवाल और दीपिका पुजारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसी पहलें समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकती हैं ।
यह साप्ताहिक कार्यशाला अब हर रविवार को श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित की जाएगी । आयोजन समिति ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से इस कार्यशाला में भेजें , ताकि उन्हें भारतीय संस्कृति , शिष्टाचार और नैतिक मूल्यों से जोड़ा जा सके ।
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