स्वतंत्र छत्तीसगढ़
शारदीय नवरात्रि का आज पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना की जाती है। स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति भाव से स्कंदमाता की पूजा करने से साधक को ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि:
- प्रातः स्नान कर घर के मंदिर को शुद्ध करें।
- मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध कर पुष्प चढ़ाएं।
- पीले या नारंगी रंग के पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- धूप, दीप, नैवेद्य और पंचामृत से माता का पूजन करें।
- इस दिन गाय के घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी होता है।
साधक को इस मंत्र का जप करना चाहिए:
“ॐ देवी स्कंदमातायै नमः”
मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। भक्तों को यह भोग प्रसाद रूप में ग्रहण करना चाहिए | स्कंदमाता की पूजा करने से बुद्धि प्रखर होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि भक्त यदि सच्चे मन से स्कंदमाता की उपासना करें, तो सभी कष्ट दूर होकर जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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