स्वतंत्र छत्तीसगढ़ /अंबिकापुर:
आगामी चंद्र ग्रहण से पूर्व आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम मां महामाया मंदिर परिसर में देखने को मिल रहा है। रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंच रही है।
मंदिर के पुजारी बबलू महाराज ने बताया कि ग्रहण काल की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ वर्जित हो जाता है। इसी कारण दोपहर 12 बजे से मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया, “आज रात 9 बजकर 57 मिनट पर चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है, जो अशुभ माना जाता है। इसी वजह से सूतक लगने के साथ मंदिरों में पूजा-पाठ बंद कर दिए जाते हैं।” पुजारी ने आगे कहा कि ग्रहण समाप्ति के बाद अगले दिन मंदिर के पट पुनः खोले जाएंगे और मां महामाया की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होगा और 8 सितंबर की रात 1 बजकर 26 मिनट तक चलेगा। लगभग 3 घंटे 28 मिनट तक चलने वाला यह खगोलीय दृश्य भारत के सभी हिस्सों में आसानी से दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह धरती की छाया में डूब जाएगा और लाल रंग का नजर आएगा, जिसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि इस समय मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर का स्मरण करना ही शुभ माना गया है।
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