रायपुर : 31 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरकारी स्कूलों में शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर एक एनजीओ द्वारा बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ‘री इंडिया स्किल वेलफेयर फाउंडेशन’ नाम के इस एनजीओ ने राज्यभर के करीब 300 बेरोजगार युवक-युवतियों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए नियुक्त कर दिया और उनसे सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर 2 से 5 लाख रुपए तक वसूल लिए।
एनजीओ के डायरेक्टर राजू रात्रे और अल्फिजा फातिमा ने रायपुर के अंबेडकर चौक स्थित वीर नारायण सिंह परिसर में ऑफिस खोलकर अखबारों और सोशल मीडिया में विज्ञापन दिया कि वे सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा सेवा दे रहे हैं और इसके बदले शिक्षकों को हर महीने 22 हजार रुपए वेतन मिलेगा। इस झांसे में आकर सैकड़ों बेरोजगारों ने एनजीओ में आवेदन किया और सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में मोटी रकम जमा कर दी।
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एनजीओ ने जॉइनिंग लेटर जारी कर शिक्षकों को रायपुर समेत विभिन्न जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने भेज दिया। जॉइनिंग लेटर में कहा गया कि यह नौकरी 58 साल तक मान्य रहेगी। कुछ महीनों तक एनजीओ ने नाममात्र की सैलरी दी, फिर धीरे-धीरे बहानेबाजी शुरू हो गई। कई शिक्षकों ने एक साल तक मुफ्त में पढ़ाया, लेकिन उन्हें वेतन नहीं मिला।
अब 1 जुलाई 2025 से एनजीओ का ऑफिस बंद है और दोनों डायरेक्टर फरार हैं। पीड़ितों का कहना है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कई बिचौलिए और एनजीओ के अन्य स्टाफ भी शामिल थे, जिन्होंने पैसे लिए और युवाओं को झांसा दिया।
रायपुर के सिविल लाइन थाने में करीब दो दर्जन पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई है। इन पीड़ितों में सुरभि सोनी, पलक गायकवाड़, प्रसेनजीत भारद्वाज, चंद्रकांता पटेल, सरोजिनी कंवर, यशोदा कंवर, गीतांजलि साहू, खिलेश्वरी साहू, जयश्री ध्रुव, रूपा वर्मा, मनीषा बाघमरे समेत कई नाम शामिल हैं।
एएसपी कीर्तन राठौर ने पुष्टि की है कि एनजीओ द्वारा राज्य के अलग-अलग जिलों से करीब 300 लोगों को ठगा गया है और उनसे करोड़ों रुपए वसूले गए हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
यह मामला बेरोजगारी और झूठे वादों के सहारे की गई ठगी का ज्वलंत उदाहरण है, जिसमें युवाओं के सपनों और आर्थिक संसाधनों के साथ बड़ा धोखा हुआ है।
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