बिलासपुर : 29 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पिता अपनी नाबालिग बेटी की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। कोर्ट ने एक कॉन्स्टेबल की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें 6 वर्षीय बच्ची को ₹5,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।
बलरामपुर निवासी याचिकाकर्ता वर्तमान में कोण्डागांव पुलिस में पदस्थ है। उसकी पत्नी ने अंबिकापुर की फैमिली कोर्ट में धारा 125 सीआरपीसी के तहत याचिका दायर कर पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, अलगाव और बच्ची की देखरेख से इनकार के आरोप लगाए थे।
फैमिली कोर्ट ने पत्नी की भरण-पोषण की मांग खारिज कर दी थी, लेकिन बच्ची के पक्ष में भत्ते का आदेश पारित किया। इसे चुनौती देते हुए कॉन्स्टेबल ने हाईकोर्ट में कहा कि वह HIV संक्रमित है और बच्ची उसकी नहीं है, इसलिए खर्च वहन करना मुश्किल है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता यह सिद्ध नहीं कर सका कि बच्ची उसकी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का आदेश साक्ष्यों के आधार पर दिया गया और उसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता का दायित्व है कि वह अपनी नाबालिग संतान की देखरेख के लिए आर्थिक सहायता दे। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
व्हाट्सअप ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक:https://chat.whatsapp.com/BbNFAy9gDg1E4s1kHkjJrG फेसबुक से जुड़ने के लिए लिंक:https://www.facebook.com/me यूट्यूब से जुड़ने के लिए लिंक : https://www.youtube.com/@swatantrachhattisgarh whatsapp चैनल से जुड़ने के लिए लिंक :https://whatsapp.com/channel/0029VaSGTZ1Lo4hYCjY45G2q ट्विटर से जुड़ने के लिए लिंक: https://x.com/c35509 इंस्टाग्राम से जुड़ने के लिए लिंक: https://www.instagram.com/swatantrachhattisgarh.com4?igsh=MWxseHI0ZHV5d2RmMA==


