रायगढ़ : 15 जुलाई 2025
रायगढ़ ज़िले के घरघोड़ा अंचल में एक बार फिर जनविरोध की लहर देखने को मिली, जब ब्लैक डायमंड कंपनी के अधिकारी बारूद प्लांट के भूमि पूजन के लिए डोकरबुड़ा पहुंचे। आदिवासी बहुल गांव डोकरबुड़ा, राबो, गतगांव और हर्राडीह के ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध जताया और कंपनी को कार्यक्रम रद्द कर बैरंग लौटना पड़ा।
ग्रामीणों का यह विरोध अचानक नहीं था, बल्कि वर्षों से वे इस प्रस्तावित प्लांट का विरोध करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की ज़मीन का डायवर्सन प्रशासन द्वारा बिना सहमति और संवैधानिक प्रक्रियाओं की अवहेलना करते हुए कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की सहमति फर्जी तरीके से दर्शाई गई, जैसा कि जिले में पहले भी कोयला खदानों के मामलों में देखा गया है।
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विरोध के दौरान महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मोर्चा संभाला और “ज़मीन नहीं देंगे” जैसे नारे लगाए। उनका कहना था कि यह संघर्ष सिर्फ ज़मीन का नहीं, बल्कि उनके हक, अस्तित्व और आत्मसम्मान का है।
ग्रामीणों ने इलाके के सांसद राधेश्याम राठिया की चुप्पी पर भी नाराज़गी जताई। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों की चुप्पी प्रशासन और कंपनियों को मौन सहमति का संदेश देती है। एक ग्रामीण महिला ने कहा, “अगर हम अब भी चुप रहे, तो हमारी चुप्पी हमारे जंगल, जल और ज़मीन को निगल जाएगी।”
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आदिवासी समुदाय अब अपने अधिकारों के प्रति पहले से कहीं ज्यादा जागरूक और संगठित हो रहा है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी ज़मीन और अधिकार सुरक्षित नहीं किए जाते, वे किसी भी परियोजना को शुरू नहीं होने देंगे।
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