रायपुर : 03 जुलाई 2025
रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलाने के नाम पर 1.62 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। CBI ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में 1 जुलाई को 6 लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। वहीं, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
रिश्वत की डील और बरामदगी
CBI जांच के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन ने NMC के कुछ अधिकारियों को रिश्वत देकर निरीक्षण की पूर्व सूचना हासिल की थी। इसके बाद फर्जी फैकल्टी, नकली मरीज और झूठे दस्तावेजों के जरिए निरीक्षण को अनुकूल दिखाया गया।
डॉ. मंजप्पा ने निरीक्षण से पहले डॉ. सतीशा को हवाला से 55 लाख रुपये लेने का निर्देश दिया था। CBI ने बेंगलुरु में छापेमारी कर:
- डॉ. सतीशा एए से ₹38.38 लाख
- रविचंद्रन केएफ (डॉ. चैत्रा के पति) से ₹16.62 लाख बरामद किए।
ब्लैकलिस्ट किए गए डॉक्टर
- डॉ. चैत्रा एमएस – एसोसिएट प्रोफेसर, श्री अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु
- डॉ. मंजप्पा सीएन – प्रोफेसर व एचओडी, मांड्या मेडिकल साइंसेज, कर्नाटक
- डॉ. अशोक शेल्के – सदस्य, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC)
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गिरफ्तार अन्य आरोपी
- सतीशा एए – निजी मेडिकल कॉलेज संचालक
- अतुल कुमार तिवारी – निदेशक, श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज
- रविचंद्रन केएफ – डॉ. चैत्रा के पति
CBI की कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया
CBI ने सभी आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा गया है। वहीं, कॉलेज की आगामी सत्र की मान्यता प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इसे भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम बताया और कहा कि भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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